कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक ने तृणमूल कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
एक सप्ताह पहले मिला था बड़ा दायित्व
गौरतलब है कि पिछले शनिवार ही तृणमूल कांग्रेस ने ज्योतिप्रिय मलिक को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया था। पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने को संगठन में उनकी बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, इसके महज एक सप्ताह के भीतर ही उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
चुनाव प्रचार में ममता ने की थी तारीफ
2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंचों से ज्योतिप्रिय मलिक की खुलकर सराहना की थी। पार्टी के भीतर उन्हें एक भरोसेमंद और अनुभवी नेता माना जाता रहा है। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा कई सवाल खड़े कर रहा है।
पार्टी के भीतर बढ़ेंगी अटकलें
ज्योतिप्रिय मलिक के इस्तीफे के पीछे की वजह अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है। हालांकि, उनके इस कदम को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तृणमूल नेतृत्व की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
स्वास्थ्य का हवाला देकर दिया इस्तीफा
ज्योतिप्रिय मलिक ने अपने इस्तीफे में कहा है कि उनकी शारीरिक स्थिति फिलहाल ठीक नहीं है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण वह संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम नहीं हैं। इसी वजह से उन्होंने पार्टी के सभी पदों से हटने का निर्णय लिया है।
बंगाल की राजनीति पर नजर
तृणमूल कांग्रेस लोकसभा चुनाव के बाद संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुटी हुई है। ऐसे समय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे को विपक्ष भी मुद्दा बना सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ज्योतिप्रिय मलिक के इस फैसले का पार्टी और राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।