कोलकाता: कोलकाता के होटल में लगी भीषण आग के मामले में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। होटल के एक कर्मचारी इंद्रदेव पासवान ने बताया कि आग की खबर रात करीब 3 बजे हंगामे की आवाज सुनने के बाद मिली। जब उन्होंने होटल मालिक को फोन किया तो उस वक्त उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। सुबह दोबारा संपर्क करने पर मालिक का फोन स्विच ऑफ मिला।
होटल मालिक के दो होटल, दूसरे होटल से मिली जानकारी
कर्मचारी के मुताबिक होटल मालिक के दो होटल हैं। जिस होटल में आग लगी, वहां दूसरी मंजिल पर आग लगी थी और तीसरी मंजिल भी होटल का हिस्सा है। वहीं, दूसरे होटल जापान में रिसेप्शन पर काम करने वाले इंद्रदेव ने बताया कि आग लगने वाले होटल में वे काम नहीं करते, इसलिए वहां की व्यवस्थाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।
आग की सूचना फायर ब्रिगेड को ग्राहक ने दी
इंद्रदेव ने बताया कि होटल में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड को होटल के किसी ग्राहक ने फोन कर सूचना दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके होटल में आग से बचाव के उपकरण मौजूद हैं, लेकिन जिस होटल में आग लगी, वहां ये उपकरण थे या नहीं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
9 लोगों की मौत, मृतकों में बांग्लादेशी नागरिक होने की बात
होटल कर्मचारी ने बताया कि उन्हें बाहर से मिली जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों में करीब सात बांग्लादेशी नागरिक और एक-दो भारतीय नागरिक शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है। होटल में भारतीय और बांग्लादेशी, दोनों तरह के लोग ठहरते थे।
होटल कर्मचारी संदीप पासवान की भी मौत
आग में होटल के एक कर्मचारी संदीप पासवान की भी मौत हुई है। इंद्रदेव के मुताबिक संदीप झारखंड के रहने वाले थे और होटल के रिसेप्शन पर रजिस्टर समेत अन्य काम संभालते थे। उनकी मौत की सूचना उनके परिवार को दे दी गई है और शव फिलहाल मेडिकल प्रक्रिया के लिए रखा गया है।
आग लगने वाले होटल की व्यवस्था पर कर्मचारी ने जताई अनभिज्ञता
सीढ़ियों की स्थिति, फायर एग्जिट और होटल में उस समय कितने लोग मौजूद थे, इन सवालों पर इंद्रदेव ने कहा कि वे उस होटल में काम नहीं करते थे, इसलिए इन बातों की उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वहां काम करने वाले बाकी कर्मचारी सुरक्षित हैं।
हादसे के बाद होटल मालिक से संपर्क नहीं हो पाने और होटल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह और सुरक्षा इंतजामों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।