पश्चिम बंगाल: की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों में शुमार नंदीग्राम में आगामी उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा खाली की गई इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, सबसे प्रमुख नाम सुवेंदु अधिकारी के दिवंगत आप्त सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की मां हंसी रथ का सामने आ रहा है।
रेयापाड़ा में बीजेपी की अहम बंद कमरे में बैठक
निर्वाचन आयोग द्वारा नंदीग्राम में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किए जाने के बाद से ही बीजेपी ने अपनी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। हाल ही में नंदीग्राम के रेयापाड़ा स्थित विधायक कार्यालय में केंद्रीय और राज्य स्तर के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन किया गया, जिसमें हंसी रथ के नाम पर काफी गंभीरता से विचार किया गया है।
शहीद सहयोगी के परिवार पर दांव और सहानुभूति की लहर
मई महीने में चुनाव नतीजों के तुरंत बाद बंदूकधारियों की गोलीबारी में सुवेंदु अधिकारी के लंबे समय तक छाया की तरह साथ रहने वाले सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई थी। चंद्रनाथ की मां हंसी रथ लंबे समय से स्थानीय स्तर पर सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं। हंसी रथ ने कहा है कि अगर पार्टी उन्हें जिम्मेदारी सौंपती है, तो वह अपने खून की आखिरी बूंद तक दायित्व का निर्वहन करेंगी। पार्टी नेतृत्व का एक वर्ग मानता है कि उन्हें मैदान में उतारकर चंद्रनाथ के बलिदान को सम्मान देने के साथ-साथ जनता की सहानुभूति और भावनाओं को भी जोड़ा जा सकता है।
रेस में कई अन्य संगठनात्मक चेहरे भी शामिल
हालांकि, नंदीग्राम की इस प्रतिष्ठित सीट के लिए बीजेपी के पास केवल हंसी रथ ही एकमात्र विकल्प नहीं हैं। तमलुक संगठनात्मक जिले के बीजेपी नेताओं के बीच अंजन भारती, मेघनाद पाल और प्रलय पाल जैसे वरिष्ठ और परिचित कार्यकर्ताओं के नामों पर भी चर्चा चल रही है। पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह एक अनुशासित पार्टी है और उम्मीदवार के चयन पर अंतिम निर्णय राज्य और केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा।
टीएमसी खेमे में सन्नाटा और प्रशासनिक बैठकों से दूरी
दूसरी ओर, नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय संगठन में कोई खास हलचल दिखाई नहीं दे रही है। यहां तक कि जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी टीएमसी का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। राज्य में राजनीतिक बदलाव के बाद पूर्व मेदिनीपुर जिले के कई प्रमुख टीएमसी नेता अपनी पार्टी की गतिविधियों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस सीट पर अपने दिवंगत कार्यकर्ता की मां पर दांव लगाती है या किसी अन्य अनुभवी चेहरे को चुनाव मैदान में उतारती है।