कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (RG Kar Medical College Hospital) में डॉक्टर-छात्रा के साथ हुए रेप और मर्डर केस की नए सिरे से शुरू हुई जांच (Re-investigation) अब काफी तेज हो गई है। इसी सिलसिले में बुधवार को पानीहाटी श्मशान घाट का दौरा करने के ठीक एक दिन बाद, यानी गुरुवार को सीबीआई (CBI) ने पानीहाटी के पूर्व टीएमसी विधायक निर्मल घोष (Nirmal Ghosh) को तलब किया। निर्मल घोष पूछताछ के लिए साल्ट लेक स्थित सीबीआई दफ्तर पहुंचे, जहां जांच अधिकारियों ने उनका बयान दर्ज किया है।
दरअसल, पीड़िता के माता-पिता शुरू से ही यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि परिवार की मर्जी के खिलाफ उनकी बेटी के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। परिवार ने जिन लोगों पर उंगली उठाई थी, उनमें पूर्व विधायक निर्मल घोष का नाम भी शामिल है। दावा है कि दाह संस्कार के समय निर्मल घोष भी श्मशान घाट पर मौजूद थे।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को पानीहाटी श्मशान घाट पर जांच टीम ने वहां के एक कर्मचारी से पूछताछ की थी। अब उस कर्मचारी के बयान का मिलान निर्मल घोष के बयान से किया जाएगा।
श्मशान के इनचार्ज और पीड़िता के पिता के दावों में टकराव
इस मामले में श्मशान घाट के इनचार्ज और पीड़िता के परिवार के बयानों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है:श्मशान इनचार्ज का दावा: सीबीआई का सामना करने के बाद श्मशान के इनचार्ज भोलानाथ पात्र ने कहा, "पीड़िता का शव रात 11 बजे आया था। उनके माता-पिता भी साथ थे। अगर उनमें से किसी एक ने भी आपत्ति जताई होती, तो हम अंतिम संस्कार नहीं करते। मैंने सीबीआई को भी यही बताया है।"
पीड़िता के पिता का पलटवार: इनचार्ज के बयान पर पीड़िता के पिता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "श्मशान के इनचार्ज आखिर किसके तहत नौकरी करते हैं? वह अपनी नौकरी बचाने के लिए अब यह सब कह रहे हैं। हमारे वहां पहुंचने से पहले ही सब कुछ प्लान कर लिया गया था। आखिर एक शव को जलाने के लिए वहां इतनी पुलिस क्यों तैनात थी? वहां पहले से मौजूद दो अन्य शवों को छोड़कर मेरी बेटी का अंतिम संस्कार जल्दबाजी में किया गया।"
हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा शुरू हुई जांच
गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को आरजी कर अस्पताल के सेमिनार रूम से डॉक्टर-छात्रा का शव बरामद हुआ था। पहले कोलकाता पुलिस ने इसकी जांच की थी, लेकिन बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। इस मामले में निचली अदालत ने मुख्य आरोपी संजय रॉय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हालांकि, हाल ही में पीड़िता के परिवार ने सीबीआई की पहली जांच में कई कमियों और लापरवाही का हवाला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में पुनर्जांच की अपील की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर मामले की नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया, जिसके बाद यह कार्रवाई की जा रही है।