कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच के बीच सीआईडी को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने तृणमूल कांग्रेस की महत्वपूर्ण प्रस्ताव पुस्तिका बल्लीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय के आवास से बरामद की है। इस दस्तावेज़ को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
सीआईडी को मिली अहम दस्तावेजी कड़ी
हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच कर रही सीआईडी लंबे समय से प्रस्ताव पुस्तिका की तलाश में जुटी थी। जांच के दौरान एजेंसी को यह दस्तावेज़ शोभनदेव चट्टोपाध्याय के घर से मिला। अधिकारियों का मानना है कि यह पुस्तिका मामले की सच्चाई तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
शोभनदेव चट्टोपाध्याय से हुई पूछताछ
सीआईडी अधिकारियों ने विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय से उनके आवास पर जाकर पूछताछ की। करीब आधे घंटे तक चली इस बातचीत में जांचकर्ताओं ने मामले से जुड़े कई सवाल पूछे। पूछताछ के दौरान उनका बयान भी दर्ज किया गया और इसी प्रक्रिया में प्रस्ताव पुस्तिका की प्रति एजेंसी के हाथ लगी।
पहले अभिषेक और ममता के कार्यालयों में हुई थी तलाश
जांच के शुरुआती चरण में सीआईडी ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े कार्यालयों में भी दस्तावेज़ की तलाश की थी। हालांकि वहां से प्रस्ताव पुस्तिका नहीं मिल सकी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और आखिरकार यह दस्तावेज़ बल्लीगंज विधायक के आवास से बरामद हुआ।
क्या होती है प्रस्ताव पुस्तिका?
प्रस्ताव पुस्तिका किसी राजनीतिक दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज़ होती है। इसमें विपक्ष के नेता, संसदीय दल के नेता और अन्य महत्वपूर्ण पदों से जुड़े प्रस्तावों और निर्णयों का रिकॉर्ड रखा जाता है। नियमों के अनुसार इसकी एक प्रति विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी जाती है, जबकि दूसरी प्रति पार्टी के पास सुरक्षित रखी जाती है।
हस्ताक्षरों को लेकर क्यों उठा विवाद?
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े प्रस्ताव पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर सवाल खड़े हुए थे। आरोप लगाया गया था कि जिन विधायकों के हस्ताक्षर दस्तावेज़ में मौजूद हैं, उनमें से कुछ उस समय बैठक में मौजूद नहीं थे। इसी आरोप के बाद मामले की जांच शुरू हुई थी।
अब हस्ताक्षरों की होगी फोरेंसिक जांच
सीआईडी अब बरामद प्रस्ताव पुस्तिका में दर्ज हस्ताक्षरों की विस्तृत जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर हस्ताक्षरों का फोरेंसिक परीक्षण भी कराया जा सकता है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दस्तावेज़ में मौजूद सभी हस्ताक्षर वास्तविक हैं या फिर किसी प्रकार की जालसाजी हुई है।
जांच के अगले चरण पर सबकी नजर
प्रस्ताव पुस्तिका मिलने के बाद जांच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। अब सीआईडी की रिपोर्ट और हस्ताक्षर सत्यापन के नतीजों पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। मामले की आगे की कार्रवाई पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकती है।