कोलकाता: सत्ता परिवर्तन के बाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर कार्रवाई का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में पूर्व उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदययन गुहा को कोलकाता के फूलबागान स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कूच बिहार जिला पुलिस ने उन्हें वित्तीय गबन और जबरन वसूली के एक पुराने मामले में हिरासत में लिया है।
छह गंभीर आरोपों का सामना
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उदयन गुहा के खिलाफ वर्तमान में कुल छह गंभीर आरोप दर्ज हैं, जिनमें वित्तीय अनियमितताओं से लेकर आपराधिक मामलों तक शामिल हैं। फिलहाल जिस मामले में गिरफ्तारी हुई है, वह दिन्हाटा क्षेत्र में एक एनजीओ के नाम पर कथित जबरन वसूली से जुड़ा है, जिसकी शिकायत 12 जून को दर्ज की गई थी।
पुराने मामले में कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, यह मामला दिन्हाटा उपजिला अस्पताल के ‘पीकू’ (बाल विभाग) से जुड़ा है, जहां एक गैर सरकारी संगठन के नाम पर बड़ी रकम की वसूली के आरोप सामने आए थे। पुलिस का कहना है कि इस मामले में जांच के आधार पर गिरफ्तारी की गई है और आरोपी को सियालदह अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर कूच बिहार ले जाया जाएगा।
भाजपा विधायक का बयान
दिन्हाटा के भाजपा विधायक अजय रॉयने इस गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उदयन गुहा पर लंबे समय से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पहले ही हो जानी चाहिए थी और कानून सभी के लिए समान है।
टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व पर असर
उदययन गुहा को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के दूसरे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी के बाद उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही है कि उत्तर बंगाल में उनके प्रभाव के कारण कई प्रशासनिक फैसलों पर उनका दबदबा था। गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।