कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चौबीस घंटे के भीतर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अखिल भारतीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) को दो अलग-अलग मामलों में बड़ी जांच एजेंसियों की मैराथन पूछताछ का सामना करना पड़ा है। सोमवार को शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लंबी पूछताछ के बाद, मंगलवार को चुनाव के दौरान कथित भड़काऊ टिप्पणी करने के मामले में राज्य सीआईडी (CID) ने उनसे करीब साढ़े छह घंटे तक सघन पूछताछ की।
मंगलवार शाम ठीक 6 बजकर 25 मिनट पर कोलकाता के भवानी भवन (CID मुख्यालय) से बाहर निकलने के बाद अभिषेक बनर्जी किसी से बात किए बिना सीधे कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के लिए रवाना हो गए, जहां वे पार्टी की एक महत्वपूर्ण और आपात बैठक में शामिल हुए।
वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने तैयार की थी लंबी प्रश्नावली
निर्धारित समयानुसार, अभिषेक बनर्जी मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे भवानी भवन स्थित सीआईडी कार्यालय पहुंचे थे। सूत्रों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए सीआईडी ने अनुभवी अधिकारियों की एक विशेष टीम (Special Team) का गठन किया था। जांचकर्ताओं ने अभिषेक के बयानों और उसके पीछे के राजनीतिक उद्देश्यों को स्पष्ट करने के लिए एक विस्तृत प्रश्नावली तैयार की थी। भवानी भवन में कई उच्च पदस्थ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से उनसे पूछताछ की और इस दौरान उनका आधिकारिक बयान भी रिकॉर्ड किया गया।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले विधानसभा में फर्जी हस्ताक्षर (Sign Forgery) के एक मामले की जांच के सिलसिले में भी अभिषेक बनर्जी को सीआईडी के समक्ष पेश होना पड़ा था।
क्या है 'डीजे विवाद' और क्यों दर्ज हुआ मामला?
यह पूरा विवाद हाल ही में संपन्न हुए 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा (BJP) के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए अभिषेक बनर्जी के गले से कई तीखे और विवादित बयान सुने गए थे। इसी दौरान उनका 'डीजे बजाने' (DJ) से जुड़ा एक खास बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा में आया था।
सीआईडी के पास दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि:
चुनावी जनसभा में अभिषेक बनर्जी की शारीरिक भाषा (Body Language), बोलने का अंदाज और शब्दों का चयन पूरी तरह से उकसाने वाला था।
विपक्षी कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह बयान सीधे तौर पर उनके खिलाफ एक खुली धमकी की तरह था।
इस बयान के कारण चुनावी माहौल के दौरान राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने और तनाव फैलने की आशंका जताते हुए मामला दर्ज कराया गया था, जिसकी जांच बाद में सीआईडी को सौंप दी गई।
कालीघाट जाकर सीआईडी ने थमाया था नोटिस
बीते शुक्रवार को सीआईडी के अधिकारी खुद कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के 'शांतिनिकेतन' आवास पर गए थे और उन्हें 16 जून (मंगलवार) को हाजिर होने का कानूनी समन नोटिस थमाया था। इसी नोटिस का सम्मान करते हुए टीएमसी सांसद मंगलवार को भवानी भवन पहुंचे थे।
एक तरफ जहां भर्ती घोटाले में ईडी का शिकंजा और दूसरी तरफ भड़काऊ बयान मामले में सीआईडी की साढ़े छह घंटे की पूछताछ ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। भवानी भवन से निकलकर सीधे ममता बनर्जी के घर जाने और वहां चल रही बैठक को लेकर राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि टीएमसी अब इन कानूनी लड़ाइयों के खिलाफ अपनी अगली रणनीतिक रूपरेखा तैयार कर रही है।
क्या था अभिषेक बनर्जी का वह 'डीजे' वाला बयान?
साल 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेतृत्व को निशाना बनाते हुए कई आक्रामक बयान दिए थे। इनमें से सबसे विवादित बयान 'डीजे बजाने' और 'रवींद्र संगीत' से जुड़ा था। जनसभा में उनके वास्तविक शब्द इस प्रकार थे:
“4 तारीख (नतीजों के दिन) को रवींद्र संगीत के साथ हल्का सा थोड़ा डीजे भी बजेगा। रवींद्र संगीत तो हर बार बजता है, लेकिन इस बार उसके साथ हल्का सा डीजे भी बजेगा। जो लोग ज्यादा उछल-कूद कर रहे हैं, वे याद रखें कि हमारी शिष्टता (सौजन्य) हमारी कमजोरी नहीं है।”
यद्यपि ऊपरी तौर पर इस बयान को एक राजनीतिक चुटकी या मजाक के रूप में देखा गया, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी के बोलने के अंदाज, शारीरिक भाषा (Body Language) और शब्दों के चयन में विपक्षी कार्यकर्ताओं के लिए एक तीखी चेतावनी और खुली धमकी छिपी थी।
बिधाननगर साइबर थाने से CID तक पहुंचा मामला
इस बयान के बाद चुनावी माहौल में तनाव पैदा करने और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के आरोप में सबसे पहले बिधाननगर साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाद में इसकी जांच राज्य सीआईडी (CID) को सौंप दी गई।
बीते शुक्रवार को सीआईडी के जांच अधिकारी खुद अभिषेक बनर्जी के आवास पर गए थे और उन्हें समन (नोटिस) थमाया था। इसी नोटिस के आधार पर मंगलवार को वे भवानी भवन स्थित मुख्यालय में हाजिर हुए। हालांकि, इस पूछताछ के बाद उन्हें दोबारा कब बुलाया जाएगा, इस बारे में सीआईडी की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
मुकदमों से घिरे अभिषेक, हर बार पहुंच रहे कालीघाट
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बंगाल में सत्ता बदलने के बाद से अभिषेक बनर्जी व्यावहारिक रूप से मुकदमों के जाल में घिर गए हैं। सीआईडी से लेकर ईडी (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियां अलग-अलग मामलों में उनसे लगातार पूछताछ कर रही हैं।
हाल के दिनों में एक खास पैटर्न देखने को मिला है कि जब भी किसी मामले में अभिषेक बनर्जी से पूछताछ खत्म होती है, वे वहां से सीधे कालीघाट में अपनी दलनेत्री ममता बनर्जी के घर पहुंचते हैं। मंगलवार को भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिससे साफ है कि कानूनी चुनौतियों के बीच टीएमसी नेतृत्व हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है और अपनी अगली राजनीतिक व कानूनी रणनीति तैयार करने में जुटा है।