कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबकी नजरें राज्य विधानसभा के आगामी सत्र पर टिक गई हैं। आगामी 18 जून (गुरुवार) सुबह 11 बजे राज्यपाल के अभिभाषण के साथ नई भाजपा सरकार के पहले विधानसभा सत्र की औपचारिक शुरुआत होगी। सत्ता बदलने के बाद विपक्ष की भूमिका, तृणमूल कांग्रेस में मची टूट और नई सरकार की आर्थिक नीतियों जैसे कई मुद्दों के कारण इस बार विधानसभा का गलियारा बेहद सरगर्म है।
सत्र को सुचारू और संसदीय नियमों के तहत चलाने के लिए मंगलवार को विधानसभा में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक और कार्य मंत्रणा समिति (बिजनेस एडवाइजरी कमेटी) की विशेष बैठक आयोजित की गई।
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का दबदबा, TMC को झटका
इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि जहां एक तरफ शासक दल के शीर्ष नेतृत्व के साथ विपक्षी खेमे की मजबूत मौजूदगी दिखी, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा। सर्वदलीय बैठक में इस बार टीएमसी के वरिष्ठ नेता व बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय और बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष को आमंत्रित ही नहीं किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति में तृणमूल बैकफुट पर है।
बैठक में विपक्ष की ओर से विधानसभा के नए नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बंदोपाध्याय (Ritabrata Banerjee), माकपा (CPM) विधायक मुस्तफिजुर रहमान राणा और आईएसएफ (ISF) विधायक नौशाद सिद्दीकी उपस्थित रहे। शासक और विपक्षी दलों की आपसी सहमति से तय हुआ है कि यह सत्र फिलहाल 25 जून तक चलेगा।
22 जून को पेश होगा वर्ष 2026-27 का राज्य बजट
इस पहले सत्र का सबसे आकर्षण और महत्वपूर्ण केंद्र नई सरकार का पहला पूर्ण बजट होने जा रहा है। तय कार्यक्रम के अनुसार, 22 जून (सोमवार) ठीक दोपहर 12 बजे राज्य के माननीय वित्त मंत्री वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) पेश करेंगे। इस बजट से समाज के सभी वर्गों को काफी उम्मीदें हैं कि नई सरकार रोजगार, उद्योग और आर्थिक सुधार के लिए क्या रोडमैप लाती है। इसके बाद 23 और 24 जून को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और बजट पर बहस होगी।
आक्रामक मूड में विपक्ष: सरकार को घेरने की रणनीति तैयार
बैठक के बाद विपक्षी नेताओं ने साफ कर दिया कि वे सदन के भीतर सरकार के हर कदम का बारीकी से विश्लेषण करेंगे।
"हम जिम्मेदार और तीखे विपक्ष की भूमिका निभाएंगे" — ऋतब्रत बंदोपाध्याय
नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बंदोपाध्याय ने मीडिया से कहा, *"राज्य के बदले राजनीतिक परिदृश्य में यह सत्र बेहद महत्वपूर्ण है। जनता की नई सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। हम एक जिम्मेदार, तीखे और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। लेकिन अगर सरकार जनविरोधी नीतियां या बिल लाती है, तो हम उसका पुरजोर विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे।"
वहीं, माकपा विधायक मुस्तफिज रहमान राणा ने कहा कि उनका मुख्य फोकस आम मेहनतकश जनता, किसानों और श्रमिकों की समस्याओं को उठाना है। वे देखना चाहते हैं कि नई सरकार इन बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए क्या दिशा दिखाती है।
दूसरी ओर, आईएसएफ (ISF) विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी साफ किया कि वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मैं राज्य के अल्पसंख्यकों, गरीबों और हाशिए पर मौजूद लोगों के विकास के मुद्दों को नियमों के तहत सदन में मजबूती से उठाऊंगा।"
अब देखना दिलचस्प होगा कि इस ऐतिहासिक सत्र में जहां विपक्ष सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है, वहीं नई सरकार अपने पहले बजट और नीतियों के जरिए बंगाल की जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।