पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत के बाद अब सबकी निगाहें विधानसभा पर टिकी हैं। सोमवार, 22 जून को वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्त वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का पहला पूर्ण बजट पेश करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत से बनी भाजपा सरकार का यह पहला आर्थिक दस्तावेज होगा, जो बंगाल की नई वित्तीय दिशा तय करेगा।
₹7.1 लाख करोड़ का कर्ज और सुवेंदु सरकार की बड़ी परीक्षा
नई सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती राज्य की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति है। पश्चिम बंगाल वर्तमान में ₹7.1 लाख करोड़ से अधिक के भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। राज्य का 'ऋण और जीएसडीपी' (Debt-to-GSDP) अनुपात लगभग 38% से 39% के बीच है, जो देश के बड़े राज्यों में सबसे अधिक है (इसकी तुलना में गुजरात या महाराष्ट्र का यह अनुपात मात्र 15% है)। आलम यह है कि राज्य को हर साल लगभग ₹49,000 करोड़ केवल पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च करना पड़ता है।
इस भारी कर्ज और सीमित वित्तीय संसाधनों के बीच, एक तरफ औद्योगीकरण और बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का विकास, तो दूसरी तरफ जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना—इन दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना सुवेंदु सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।
बजट 2026-27 के मुख्य संभावित बिंदु और घोषणाएं:
1. कर्ज के जाल (Debt Trap) से मुक्ति का रोडमैप
वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्त अगले 3 से 5 वर्षों के लिए राजकोषीय घाटे को कम करने का एक मध्यकालिक 'रोडमैप' घोषित कर सकते हैं। इसके लिए वित्त विभाग के तहत एक विशेष 'डेट मैनेजमेंट सेल' बनाया जा सकता है, जो पुराने ऊंचे ब्याज वाले ऋणों का पुनर्गठन करेगा। साथ ही, अनावश्यक प्रशासनिक खर्चों और फिजूलखर्ची को रोकने के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं।
2. बिना नया टैक्स लगाए राजस्व बढ़ाने की रणनीति
आम जनता पर टैक्स का नया बोझ डाले बिना राज्य की कमाई बढ़ाने के लिए सरकार कुछ कड़े और पारदर्शी कदम उठाएगी:
बालू (रेत) और अन्य लघु खनिजों से अवैध सिंडिकेट की जेब में जाने वाले राजस्व को रोकने के लिए सख्त निगरानी के साथ पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था शुरू की जाएगी।
बंद पड़ी सरकारी मिलों और फैक्ट्रियों की अप्रयुक्त भूमि तथा सरकारी लैंड बैंक की अधिशेष भूमि को दीर्घकालिक लीज पर देकर एकमुश्त बड़ी कुंजी जुटाई जाएगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल निगरानी और ई-इनवॉइसिंग तकनीक के माध्यम से जीएसटी चोरी रोकने के लिए बड़े प्रशासनिक सुधारों की घोषणा की जा सकती है।
3. भारी उद्योग, 'सिंगल विंडो' और 4 नए औद्योगिक कॉरिडोर
नई सरकार का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश होने जा रहा है—"भत्ता नहीं, रोजगार"। बंगाल को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में शीर्ष पर लाने के लिए लैंड बैंक और लाइसेंस राज में आमूलचूल बदलाव किए जाएंगे। बजट में नौकरशाही की जटिलताओं को खत्म करने के लिए 'सिंगल विंडो' प्रणाली को पूरी तरह लागू करने की दिशा तय होगी। इसके अलावा, निवेश आकर्षित करने के लिए 4 क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जा सकती है:
कोलकाता मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र: लॉजिस्टिक्स, आईटी और फाइनेंस हब।
दुर्गापुर-आसानसोल क्षेत्र: धातु, इंजीनियरिंग और भारी उद्योग।
हल्दिया औद्योगिक क्षेत्र: पेट्रोकेमिकल और बंदरगाह-आधारित उद्योग।
सिलीगुड़ी आर्थिक क्षेत्र: उत्तर-पूर्वी भारत और पड़ोसी देशों के प्रवेश द्वार के रूप में वेयरहाउसिंग और निर्यात केंद्र।
4. एमएसएमई (MSME) और कृषि के लिए 'बेंगल एमएसएमई ग्रोथ फंड'
बंगाल में रोजगार का एक बड़ा हिस्सा एमएसएमई क्षेत्र से आता है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ब्याज सब्सिडी, आसान ऋण और सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी। बिष्णुपुर के रेशम, मुर्शिदाबाद के हस्तशिल्प, हावड़ा के इंजीनियरिंग, मालदा के खाद्य प्रसंस्करण और नादिया के हथकरघा उद्योग के लिए विशेष 'क्लस्टर विकास' और ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करने के लिए 'बेंगल एमएसएमई Growth Fund' का गठन किया जा सकता है। किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए कोल्ड स्टोरेज चेन पर बड़ी सब्सिडी की घोषणा भी संभावित है।
5. केंद्रीय योजनाओं को रफ्तार (Capex Push)
नई सरकार दिल्ली (केंद्र सरकार) के साथ समन्वय बढ़ाकर फंड हासिल करने की रणनीति पर काम करेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी जो परियोजनाएं नाम-विवाद के कारण रुकी हुई थीं, उनके लिए राज्य के हिस्से का फंड एकमुश्त आवंटित किया जा सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर सीमावर्ती क्षेत्रों में बीएसएफ (BSF) की कंटीली तारों की बाड़ लगाने के लिए भूमि अधिग्रहण में तेजी लाई जाएगी और जिला स्तर पर सड़कों व पुलों की मरम्मत के लिए विशेष कोष बनाया जाएगा।
6. रोजगार और कौशल विकास
टाटा, मारुति या एलएंडटी जैसी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Venture) के माध्यम से राज्य के आईटीआई (ITI) और पॉलिटेक्निक कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बनाया जाएगा। जो स्थानीय उद्योग बंगाल के युवाओं को काम पर रखकर प्रशिक्षण देंगे, उनके स्टाइपेंड का एक हिस्सा राज्य सरकार सीधे वित्तीय सब्सिडी के रूप में वहन कर सकती है।
7. उत्तर बंगाल के लिए 'विशेष पैकेज'
उत्तर बंगाल को एक अलग आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना है। उत्तर बंगाल के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए तीस्ता नदी के पानी का उपयोग करके एक मेगा प्रोजेक्ट की घोषणा हो सकती है। दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और डूआर्स को मिलाकर इको-टूरिज्म और होम-स्टे के लिए टैक्स छूट व नए पर्यटन कॉरिडोर की घोषणा की संभावना है।
'लक्ष्मी भंडार' की जगह 'अन्नपूर्णा योजना': 22 लाख फर्जी लाभार्थी बाहर
आम जनता के बीच सबसे बड़ी उत्सुकता पिछली सरकार की 'लक्ष्मी भंडार' योजना को लेकर थी, जिसे अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है। पुरानी योजना का स्थान अब 'अन्नपूर्णा योजना' ले रही है। इसके तहत 25 से 60 वर्ष की आयु की सभी पात्र महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता को बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह कर दिया गया है।
हालांकि, इस विशाल सामाजिक वित्तीय दायित्व को संभालने के लिए वित्त मंत्री बजट में कुछ कड़े फिल्टर और छंटनी के नियमों की घोषणा भी कर सकते हैं। सरकारी सत्यापन और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) डेटा के माध्यम से पहले ही लगभग 22 लाख फर्जी या अपात्र लाभार्थियों को सूची से बाहर किया जा चुका है। वित्तीय बर्बादी को रोकने के लिए आयकर दाताओं, सरकारी कर्मचारियों और जिन परिवारों में किसी को संस्थागत पेंशन मिलती है, उन्हें इस योजना से बाहर रखने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और आय की ऊपरी सीमा इस बजट में तय की जा सकती है।
बजट की मूल थीम: "भत्ता-निर्भरता से संपत्ति और रोजगार सृजन"
भाजपा सरकार के इस पहले बजट का मूल मंत्र होने जा रहा है—"From Welfare Dependency to Wealth Creation" (भत्ता-निर्भरता से संपत्ति और रोजगार सृजन)। इसका सीधा मतलब यह है कि गरीबों का कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तो सुचारू रूप से लागू रहेंगी, लेकिन राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कारखानों, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर सबसे अधिक जोर दिया जाएगा।