कोलकाता डेस्क : पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए बड़े बदलाव के बाद अब कोलकाता नगर निगम (KMC) के प्रशासनिक ढांचे में भी बहुत बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे और पूरा पुरबोर्ड ढहने से प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया था। इस स्थिति से निपटने और आगामी 7 दिसंबर 2026 तक नया पुरबोर्ड गठित करने की समयसीमा के बीच, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकातावासियों के लिए दो बेहद महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।
अब पार्षदों की जगह 'विधायक' संभालेंगे नागरिक सेवाएं
टीएमसी के कई पूर्व पार्षदों के भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने और बोर्ड भंग होने के कारण आम जनता को कैरेक्टर सर्टिफिकेट, रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट या आय-व्यय प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेजों के लिए भटकना पड़ रहा था।
जनता की इस परेशानी को दूर करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को केएमसी की बैठक के बाद एलान किया, "जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक नागरिक सेवाओं को सुचारू रखने की जिम्मेदारी स्थानीय विधायकों (MLAs) के कंधों पर होगी। अब तक जो प्रमाण पत्र वार्ड स्तर पर पार्षद जारी करते थे, वे सभी सर्टिफिकेट अब नागरिक अपने क्षेत्र के विधायक के कार्यालय से प्राप्त कर सकेंगे।" चुनाव आयोग और सरकारी नियमों के तहत विधायक इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच कर इन्हें जारी करने के लिए अधिकृत होंगे।
कोलकाता में होगा वार्डों का पुनर्गठन (Delimitation)
मुख्यमंत्री ने कोलकाता नगर निगम के तहत आने वाले वार्डों के पुनर्गठन को बेहद जरूरी बताया। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "कोलकाता के कुछ वार्डों में आबादी का बोझ बहुत ज्यादा है, जबकि कुछ वार्डों में जनसंख्या बेहद कम है। सभी नागरिकों तक समान और उन्नत नागरिक सेवाएं पहुँचाने के लिए वार्डों की सीमाओं में बदलाव (आसन पुनर्विन्यास) बहुत जरूरी है।"
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि राज्य चुनाव आयोग इस डिलिमिटेशन प्रक्रिया को पूरा करेगा। इसके लिए विभिन्न विभागों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकों का दौर शुरू होगा और इसका एक प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है। माना जा रहा है कि अगले 6 महीने के भीतर होने वाले पुरवोट से पहले इस पुनर्गठन को अमलीजामा पहना दिया जाएगा।
राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 'मिशन 7 दिसंबर'
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही टीएमसी के भीतर अंतर्विरोध और इस्तीफों का दौर जारी है, जिसके चलते कई नगर पालिकाओं में प्रशासक नियुक्त करने पड़े हैं। कोलकाता में आखिरी बार निकाय चुनाव साल 2021 में हुए थे और इस बोर्ड का कार्यकाल दिसंबर में ही खत्म होने वाला था, लेकिन राजनीतिक ड्रामे के कारण यह पहले ही भंग हो गया। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनका लक्ष्य 7 दिसंबर तक हर हाल में लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराकर नया बोर्ड गठित करना है और तब तक जनता को किसी भी सेवा से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।