नई दिल्ली. वित्त मंत्रालय ने उन सभी रिपोर्टों और सोशल मीडिया दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें यह कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार मंदिरों, ट्रस्टों और धार्मिक संस्थानों के लिए नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन योजना लाने की तैयारी कर रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार के स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव न तो स्वीकृत किया गया है और न ही इस विषय पर किसी प्रकार की औपचारिक चर्चा चल रही है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे दावे
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर यह दावा किया जा रहा था कि देशभर के मंदिरों में रखे स्वर्ण भंडार को सरकारी नियंत्रण में लाने की योजना बनाई जा रही है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि मंदिरों के सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी किए जा सकते हैं या फिर इन भंडारों को भारत के “स्ट्रैटेजिक गोल्ड रिजर्व” का हिस्सा बनाया जा सकता है। इन खबरों के सामने आने के बाद धार्मिक संस्थानों और श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का माहौल बन गया था।
वित्त मंत्रालय ने दावों को बताया पूरी तरह आधारहीन
वित्त मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि ऐसी खबरें तथ्यहीन और भ्रम फैलाने वाली हैं। मंत्रालय के अनुसार सरकार ने मंदिरों या धार्मिक ट्रस्टों के स्वर्ण भंडार को लेकर कोई नई नीति तैयार नहीं की है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि गोल्ड बॉन्ड अथवा रणनीतिक स्वर्ण भंडार से जुड़ी चर्चाओं का वर्तमान में किसी आधिकारिक योजना से कोई संबंध नहीं है। मंत्रालय का कहना है कि अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर भ्रम फैलाना उचित नहीं माना जा सकता।
भारत में लगातार बढ़ रहा है सोने का आयात
भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है। बीते वर्ष देश ने लगभग 72 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया था। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 की तुलना में सोने के आयात में लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ते आयात का असर देश के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ता है, जिसके चलते सरकार समय-समय पर आयात संबंधी नीतियों में बदलाव करती रही है।
आयात शुल्क बढ़ाकर खपत नियंत्रित करने की कोशिश
सोने और चांदी की बढ़ती मांग को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में इन धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाया है। पहले जहां आयात शुल्क 6 प्रतिशत था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य अनावश्यक आयात को हतोत्साहित करना और घरेलू आर्थिक संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़े हुए शुल्क का असर आने वाले समय में बाजार की मांग और कीमतों दोनों पर दिखाई दे सकता है।
धार्मिक संस्थानों के स्वर्ण भंडार पर पहले भी होती रही है चर्चा
देश के कई बड़े मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में भारी मात्रा में सोना और बहुमूल्य धातुएं सुरक्षित रखी जाती हैं। समय-समय पर इन स्वर्ण भंडारों को लेकर आर्थिक उपयोग और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि हर बार सरकार और संबंधित संस्थानों की ओर से यह स्पष्ट किया जाता रहा है कि धार्मिक आस्थाओं और संपत्तियों से जुड़े मामलों में अत्यधिक संवेदनशीलता बरती जाती है।
अफवाहों के दौर में सरकार का स्पष्ट संदेश
मंदिरों के सोने को लेकर फैल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार का यह स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसी किसी योजना पर न तो विचार हो रहा है और न ही कोई आधिकारिक प्रस्ताव मौजूद है। ऐसे में सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों और दावों से सावधान रहने की आवश्यकता है। आने वाले समय में सरकार की आर्थिक नीतियों पर जरूर नजर बनी रहेगी, लेकिन फिलहाल मंदिरों के स्वर्ण भंडार को लेकर किसी नई योजना की संभावना से सरकार ने पूरी तरह इनकार कर दिया है।