नई दिल्ली. भारतीय मुद्रा लगातार दबाव में दिखाई दे रही है। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.90 के स्तर पर खुला, जबकि मंगलवार को यह 96.5 पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेश में कमी, आयात में बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर भी दिखाई दे रहा है। अप्रैल महीने में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 28.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि मार्च में यह 20.7 अरब डॉलर था। बढ़ते घाटे और पूंजी के बाहर जाने से भुगतान संतुलन पर भी दबाव बढ़ रहा है।
सरकार अब आयात नियंत्रण की तैयारी में
सोने के आयात पर पहले से सख्ती बरत रही केंद्र सरकार अब अन्य गैर-जरूरी विदेशी सामानों के आयात को सीमित करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित होने जा रही है, जिसमें वित्त, वाणिज्य और इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में बढ़ते आयात बिल को कम करने और रुपये को स्थिर करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार सरकार ऐसे उत्पादों की पहचान कर रही है, जिन्हें भारत में आसानी से बनाया जा सकता है, लेकिन फिर भी बड़ी मात्रा में विदेशों से आयात किया जा रहा है।
कस्टम ड्यूटी बढ़ाने पर हो सकता है विचार
अधिकारियों के मुताबिक सरकार कुछ गैर-जरूरी आयातित वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने या नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकती है। उद्देश्य यह है कि घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिले और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम हो। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कुछ उत्पादों के आयात को हतोत्साहित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से नई नीतियां लागू की जा सकती हैं। हालांकि सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि आवश्यक वस्तुओं और उद्योगों की सप्लाई चेन पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।
‘लोकल मैन्युफैक्चरिंग’ को मजबूत करने पर जोर
केंद्र सरकार की रणनीति का मुख्य फोकस देश में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी कारोबारियों से अपील कर चुके हैं कि जिन वस्तुओं का निर्माण भारत में संभव है, उन्हें विदेशों से मंगाने से बचा जाए। सरकार का मानना है कि कम कीमत वाले विदेशी उत्पाद घरेलू उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों को इससे नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी कारण विभिन्न मंत्रालयों से ऐसे उत्पादों की सूची मांगी गई है, जिनके आयात को सीमित किया जा सकता है।
रोजगार और उत्पादन बढ़ाने की रणनीति
सरकार का मानना है कि यदि आयात पर निर्भरता कम होती है और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं को भी इससे मजबूती मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि घरेलू उद्योगों को पर्याप्त समर्थन मिला, तो भारत कई क्षेत्रों में आयातक से निर्यातक देश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। इससे लंबे समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे नए कदम
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि किसी भी नए प्रतिबंध या आयात नियंत्रण को संतुलित और चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। नीति बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल और आवश्यक उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित न हो। सरकार का मुख्य उद्देश्य रुपये को मजबूती देना, व्यापार घाटा कम करना और भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बनाना बताया जा रहा है।