पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाता है। यह सिर्फ एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के विश्वास, अधिकार और भागीदारी का प्रतीक है।
पूर्व सीएम कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाता है। यह सिर्फ एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के विश्वास,अधिकार और भागीदारी का प्रतीक है। लेकिन जब मतदाता सूची से नाम काटने, सामूहिक आपत्तियों और कथित फर्जी फॉर्मों की खबरें सामने आती हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मतदान का अधिकार सुरक्षित है।
एक ही व्यक्ति के नाम से सैकड़ों आपत्तियां दर्ज
हालिया रिपोर्टों में सामने आया है कि एक ही व्यक्ति के नाम से सैकड़ों आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं। जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दिखाई गई, वे खुद कह रहे हैं कि उन्होंने कोई आपत्ति नहीं की। यह स्थिति केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।लोकतंत्र का आधार सरल है। जनता सरकार चुनती है। सरकार जनता को नहीं चुनती। यदि मतदाता सूची में पारदर्शिता नहीं होगी, यदि नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया संदिग्ध लगेगी, यदि आम नागरिक को यह भय हो कि उसका नाम बिना जानकारी के काटा जा सकता है, तो लोकतंत्र की आत्मा कमजोर होती है।
यह केवल स्थानीय मुद्दा नहीं
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और भागीदारी का अधिकार देता है। मतदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक सम्मान है। यदि किसी भी स्तर पर ऐसी घटनाएँ हो रही हैं जहाँ एक ही व्यक्ति के नाम से बड़ी संख्या में आपत्तियाँ दाखिल हो रही हैं, मतदाता कह रहे हैं कि उन्होंने कोई फॉर्म नहीं भरा, और प्रशासन स्पष्ट तथा संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहा, तो यह केवल स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है।चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता लोकतंत्र की रीढ़ है। ऐसी घटनाओं पर तुरंत स्वतंत्र जाँच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही, प्रभावित मतदाताओं का सार्वजनिक सत्यापन और तकनीकी सुरक्षा उपाय अनिवार्य होने चाहिए। डिजिटल पुष्टि और पारदर्शी प्रक्रिया ही नागरिकों का विश्वास बनाए रख सकती है।
यह मुद्दा किसी एक दल या विचारधारा का नहीं है। आज यदि किसी राज्य में मतदाता सूची पर सवाल उठ रहे हैं, तो कल यह किसी और जगह भी हो सकता है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब विपक्ष, मीडिया, न्यायपालिका और नागरिक समाज मिलकर चुनावी प्रक्रिया की रक्षा करें।
हर नागरिक जागरूक हो, अपना नाम मतदाता सूची में जांचे
भारत का लोकतंत्र लंबे संघर्षों से बना है। मताधिकार कोई दया नहीं, बल्कि अधिकार है। यदि नागरिकों को यह महसूस होने लगे कि उनकी अनुमति के बिना उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है, तो यह केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चेतावनी है।समय आ गया है कि हर नागरिक जागरूक हो, अपना नाम मतदाता सूची में जांचे और किसी भी अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाए। लोकतंत्र की असली ताकत सत्ता में बैठे लोगों में नहीं, बल्कि वोट देने वाले नागरिकों में होती है।