रायपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी रायपुर में आपातकालीन पुलिस रिस्पॉन्स को बेहतर बनाने के लिए डायल-112 सेवा को 54 नए वाहनों की सौगात मिली है। पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के साथ रायपुर के विधायक और महापौर भी मौजूद रहे।
बिलासपुर और दुर्ग में भी लागू होगा कमिश्नरेट सिस्टम
कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग में भी पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे पुलिसिंग और तेज होगी तथा अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी।
कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद क्या बदला
- सरकारी आंकड़ों के मुताबिक रायपुर कमिश्नरेट के 21 थानों में अब तक 2300 से अधिक FIR दर्ज की गई हैं।
- रायपुर उत्तर क्षेत्र में सबसे अधिक 910 मामले दर्ज
- रायपुर पश्चिम में 891 मामले
- मध्य क्षेत्र में 510 मामले दर्ज
गंभीर अपराधों की बात करें तो:
- हत्या के 15 से अधिक मामले
- 66 से अधिक बलात्कार के मामले
- 25 से अधिक छेड़छाड़ के मामले दर्ज हुए
पुलिस के अनुसार चाकूबाजी की घटनाओं में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि चोरी जैसे संपत्ति संबंधी अपराधों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
- लूट और झपटमारी की 24 घटनाएं सामने आईं
- चार माह में चेन स्नैचिंग के 9 मामले दर्ज किए गए
कमिश्नरेट सिस्टम पर तेज हुई सियासत
कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर अब राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर में लागू सिस्टम को असफल बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
भूपेश बघेल ने कहा कि केवल नाम बदलने से व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। अधिकारियों को पर्याप्त अधिकार दिए बिना कमिश्नरेट सिस्टम का कोई खास फायदा दिखाई नहीं देता।
सरकार बनाम विपक्ष, अब नजर बिलासपुर और दुर्ग पर
एक तरफ राज्य सरकार डायल-112 और कमिश्नरेट सिस्टम के विस्तार को आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके प्रभाव और कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। अब देखना होगा कि बिलासपुर और दुर्ग में इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कानून व्यवस्था में कितना बदलाव देखने को मिलता है।