छत्तीसगढ़ में सब इंस्पेक्टर रेडियो से इंस्पेक्टर रेडियो पद पर प्रमोशन को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रमोशन के लिए जरूरी 8 साल की अर्हकारी सेवा की गणना वास्तविक ज्वाइनिंग डेट से नहीं, बल्कि नियुक्ति के कैलेंडर वर्ष के आधार पर की जाएगी।
इस फैसले से 2017 में नियुक्त चार पुलिस अधिकारियों को राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें 1 जनवरी 2025 से प्रमोशन के लिए पात्र मानते हुए राज्य सरकार को उनके प्रमोशन पर नियमों के अनुसार विचार करने के निर्देश दिए हैं।
2017 में हुई थी चारों अधिकारियों की नियुक्ति
यह मामला सब इंस्पेक्टर रेडियो के पद पर कार्यरत ओम प्रकाश देवांगन, धर्मेश कुमार साहू, अपराजिता सिंह राणा और गौरव शुक्ला से जुड़ा है। चारों अधिकारियों की नियुक्ति वर्ष 2017 में हुई थी, जबकि उन्होंने नवंबर 2017 में अपनी ज्वाइनिंग दी थी।छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव (नॉन-गजेटेड) सर्विस रिक्रूटमेंट रूल्स, 2021 के तहत SI रेडियो से इंस्पेक्टर रेडियो के पद पर प्रमोशन के लिए 8 साल की अर्हकारी सेवा पूरी करना जरूरी है।
ज्वाइनिंग डेट को लेकर था पूरा विवाद
चारों अधिकारियों का कहना था कि प्रमोशन के लिए अर्हकारी सेवा की गणना फीडर कैडर में नियुक्ति के कैलेंडर वर्ष से की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि नियुक्ति वर्ष 2017 को पहला वर्ष माना जाए तो 2024 तक उनके 8 साल पूरे हो जाते हैं।इसी आधार पर अधिकारियों ने दावा किया था कि वे 1 जनवरी 2025 से इंस्पेक्टर रेडियो पद पर प्रमोशन के लिए पात्र हो गए थे।
एकल पीठ ने ज्वाइनिंग डेट को माना था आधार
इस मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 10 अक्टूबर 2025 को अधिकारियों की याचिका खारिज कर दी थी। उस समय कोर्ट ने वास्तविक ज्वाइनिंग डेट को आधार माना था।एकल पीठ के अनुसार, अधिकारियों की 8 साल की अर्हकारी सेवा अक्टूबर 2025 में पूरी होती और इस आधार पर उन्हें 1 जनवरी 2026 से प्रमोशन के लिए पात्र माना जाता।इसके बाद चारों अधिकारियों ने एकल पीठ के इस आदेश को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी।
डिवीजन बेंच ने कैलेंडर वर्ष को माना सही आधार
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अर्हकारी सेवा की गणना नियुक्ति के कैलेंडर वर्ष के आधार पर करने की बात कही।कोर्ट ने माना कि चारों अधिकारियों की नियुक्ति वर्ष 2017 में हुई थी। इसलिए 2017 को पहला वर्ष, 2018 को दूसरा वर्ष और इसी क्रम में 2024 को आठवां वर्ष माना जाएगा।इस गणना के आधार पर चारों अधिकारी 1 जनवरी 2025 से प्रमोशन के लिए पात्र माने जाएंगे।
10 अक्टूबर 2025 का आदेश निरस्त
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल पीठ द्वारा 10 अक्टूबर 2025 को दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही चारों अधिकारियों की रिट अपील स्वीकार कर ली गई।अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता सौरभ साहू ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता एसएस बघेल ने पैरवी की।
प्रमोशन पर विचार करने के सरकार को निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को चारों पुलिसकर्मियों के इंस्पेक्टर रेडियो पद पर प्रमोशन के दावे पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट के आदेश के अनुसार, चारों अधिकारियों को 1 जनवरी 2025 तक 8 साल की अर्हकारी सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा। हालांकि, प्रमोशन का अंतिम निर्णय अन्य जरूरी पात्रता शर्तों और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर लिया जाएगा।इसके अलावा कोर्ट ने नियमों के तहत मिलने वाले परिणामी लाभों पर भी विचार करने के निर्देश दिए हैं।