नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शे को लेकर पेश किए गए एक प्रस्ताव पर भारत ने अपना समर्थन जताया है। प्रस्ताव में ऐसे विश्व मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिनमें अलग-अलग देशों और महाद्वीपों का क्षेत्रफल वास्तविक अनुपात के ज्यादा करीब दिखाई दे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने रविवार को इसकी जानकारी दी। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्ताव के पक्ष में मतदान का मतलब किसी एक विशेष विश्व मानचित्र को आधिकारिक मान्यता देना नहीं है। प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम से जुड़े किसी राजनीतिक विवाद पर भी फैसला नहीं करता।
भारत ने वोट के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर फिर दोहराया अपना रुख
भारत ने प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का भी उल्लेख किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, भारत के संप्रभु क्षेत्र को भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। भारत ने कहा कि देश के क्षेत्र को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसका रुख स्पष्ट है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
164 देशों ने दिया प्रस्ताव का साथ, अमेरिका ने किया विरोध
UN महासभा में पेश प्रस्ताव को भारत समेत 164 देशों का समर्थन मिला। वहीं अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। इसके अलावा एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान में तटस्थ रुख अपनाया और वोटिंग से दूरी बनाई। इस तरह प्रस्ताव को महासभा में व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला, हालांकि कुछ देशों ने इसका विरोध या मतदान से दूरी बनाना चुना।
आखिर दुनिया के नक्शे को लेकर UN का यह प्रस्ताव आया क्यों?
दुनिया का नक्शा तैयार करने के लिए अलग-अलग Map Projections का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें से एक प्रसिद्ध तरीका Mercator Projection है। इस प्रोजेक्शन में पृथ्वी की गोलाकार सतह को सपाट नक्शे पर दिखाने के दौरान कुछ क्षेत्रों का आकार वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में काफी बड़ा नजर आ सकता है। खास तौर पर ध्रुवों के करीब स्थित क्षेत्र नक्शे पर अपने वास्तविक आकार से बड़े दिखाई दे सकते हैं। UN के प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे मानचित्रों को बढ़ावा देना है, जिनमें देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल का तुलनात्मक आकार ज्यादा वास्तविक तरीके से दिखाई दे।
‘Equal Earth’ जैसे नक्शों पर क्यों है जोर?
प्रस्ताव में Equal Earth जैसे Map Projection की उपयोगिता को बढ़ावा देने की बात सामने आती है। ऐसे प्रोजेक्शन का उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के तुलनात्मक अनुपात में बेहतर ढंग से प्रदर्शित करना है। इसका एक बड़ा असर अफ्रीका जैसे महाद्वीपों को देखने के तरीके पर पड़ता है। Mercator जैसे नक्शों में कई बार अफ्रीका की तुलना में यूरोप या उत्तरी अमेरिका का आकार लोगों को अलग अनुपात में दिखाई देता है, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल का अंतर काफी अलग है। यही वजह है कि ज्यादा समानुपातिक मानचित्रों को शिक्षा और वैश्विक जागरूकता के लिए उपयोगी माना जाता है।
क्या UN का प्रस्ताव सभी देशों को नक्शे बदलने के लिए मजबूर करेगा?
नहीं। यह इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू है। संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी इसके आधार पर देशों, स्कूलों, किताबों के प्रकाशकों या टेक्नोलॉजी कंपनियों को अपने मौजूदा नक्शों से Mercator Projection हटाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसका मुख्य उद्देश्य ज्यादा सटीक और समानुपातिक विश्व मानचित्रों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है।
भारत के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए यह साफ करने की कोशिश की कि विश्व मानचित्रों में भारत के क्षेत्र को उसकी आधिकारिक स्थिति के अनुरूप प्रदर्शित किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के पूरे संप्रभु क्षेत्र को आधिकारिक भारतीय नक्शे के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए। भारत ने इस मुद्दे को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जोड़ा है। इसलिए भारत का समर्थन सिर्फ Map Projection से संबंधित नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसके साथ देश की आधिकारिक मानचित्र संबंधी स्थिति को भी स्पष्ट किया गया है।