उज्जैन/इंदौर। मध्यप्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर रेलवे ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए रेलवे यात्री परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। सिंहस्थ के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए 125 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनों के संचालन की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही इंदौर-उज्जैन कनेक्टिविटी, स्टेशन रीडेवलपमेंट, सुरक्षा तकनीक और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था पर भी फोकस किया जा रहा है।
सिंहस्थ की भीड़ के लिए अभी से रेलवे ने कसी कमर
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने रविवार को इंदौर पहुंचकर रेल परियोजनाओं और यात्री सुविधाओं की समीक्षा की। बैठक के दौरान सिंहस्थ के दौरान संभावित यात्री दबाव को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। रेलवे की कोशिश है कि श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर परिवहन व्यवस्था प्रभावित न हो। साथ ही यात्रियों पर अतिरिक्त किराए का अनावश्यक बोझ न पड़े, इस दिशा में भी प्रयास करने की बात कही गई।
125 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें क्यों जरूरी होंगी?
सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में सामान्य ट्रेन सेवाओं के साथ अतिरिक्त ट्रेनों की जरूरत पड़ सकती है। इसी को देखते हुए रेलवे 125 से अधिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों के जरिए अलग-अलग शहरों से आने वाले यात्रियों को अतिरिक्त परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
इंदौर-उज्जैन रेल कनेक्टिविटी पर खास नजर
सिंहस्थ के दौरान सिर्फ उज्जैन ही नहीं, बल्कि इंदौर और आसपास के शहरों से भी यात्रियों की आवाजाही काफी बढ़ने की संभावना है। रेलवे इसलिए इंदौर-उज्जैन के बीच कनेक्टिविटी और रेल संचालन को सुचारु बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। इंदौर से चलने वाली कुछ स्पेशल ट्रेनों को नियमित सेवा में बदलने की मांग पर भी रेलवे स्तर पर प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी गई है। अगर ऐसी सेवाएं नियमित होती हैं, तो सिंहस्थ के अलावा सामान्य दिनों में भी यात्रियों को इसका फायदा मिल सकता है।
इंदौर स्टेशन के रीडेवलपमेंट की भी हुई समीक्षा
रेलवे बोर्ड चेयरमैन ने इंदौर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्टेशन पर चल रहे काम, यात्री सुविधाओं और भविष्य में बढ़ने वाले यात्री दबाव को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों की जानकारी ली। इसके अलावा इंदौर-मनमाड़, इंदौर-खंडवा और इंदौर-उज्जैन रेल सेक्शन से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को संबंधित परियोजनाओं को गति देने के निर्देश दिए गए।
शास्त्री ब्रिज पर बढ़ने वाले ट्रैफिक को लेकर मंथन
सिंहस्थ के दौरान सड़क और रेल दोनों माध्यमों से यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए सतीश कुमार ने शास्त्री ब्रिज का निरीक्षण किया और यातायात व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से चर्चा की। भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक को संभालने के लिए नए रेलवे ओवरब्रिज और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
AI कैमरों से रेलवे स्टेशनों पर बढ़ेगी निगरानी
सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में यात्रियों की सुरक्षा रेलवे के लिए अहम चुनौती होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे स्टेशनों पर AI आधारित कैमरों के इस्तेमाल की योजना पर भी चर्चा हुई। इन तकनीकों के जरिए चेहरे की पहचान और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। इससे भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक के जरिए मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
चूहों की समस्या पर भी रेलवे का फोकस
समीक्षा के दौरान रेलवे परिसरों में चूहों की समस्या का मुद्दा भी सामने आया। अधिकारियों को पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। सिंहस्थ के दौरान स्टेशन और रेलवे परिसर में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ने वाली है। ऐसे में साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को समय रहते बेहतर करना रेलवे की तैयारियों का अहम हिस्सा है।
सिंहस्थ 2028 के लिए रेलवे की तैयारी का फोकस क्या है?
रेलवे की मौजूदा तैयारियों को मुख्य रूप से चार हिस्सों में देखा जा सकता है—अतिरिक्त ट्रेनें, बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुरक्षा और यात्री सुविधाओं का विस्तार। 125 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनों की तैयारी के साथ इंदौर-उज्जैन रेल कनेक्टिविटी, स्टेशन रीडेवलपमेंट और AI आधारित सुरक्षा तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। अब आने वाले समय में इन योजनाओं का क्रियान्वयन किस गति से होता है, इस पर नजर रहेगी।