संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे को दिखाने के तरीके में बदलाव को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव में Equal Earth Map Projection के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है। वोटिंग में 164 देशों ने इसका समर्थन किया, जबकि अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।
देशों की सीमाएं नहीं बदलेंगी
इस फैसले का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दुनिया के देशों की वास्तविक सीमाएं या क्षेत्रफल बदल जाएंगे। बदलाव केवल इस बात में होगा कि नक्शे पर अलग-अलग देशों और महाद्वीपों का आकार किस तरह दिखाई देता है। प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी है और इसका उद्देश्य ज्यादा संतुलित तरीके से दुनिया का नक्शा प्रस्तुत करना है।
Mercator Map पर क्यों उठते रहे सवाल?
दुनिया में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल होता आया है। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्र नक्शे पर अपने वास्तविक क्षेत्रफल से काफी बड़े दिखाई देते हैं। इसके चलते यूरोप, उत्तरी अमेरिका और Greenland जैसे इलाके वास्तविक अनुपात की तुलना में ज्यादा बड़े नजर आते हैं।
नए मैप में Africa का आकार बढ़ा दिखेगा
Equal Earth Projection पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों के क्षेत्रफल को ज्यादा वास्तविक अनुपात में दिखाने के लिए तैयार किया गया है। नए मैप में Africa पहले की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देगा। इसी तरह दक्षिण अमेरिका, दक्षिण एशिया और अन्य भूमध्यरेखीय क्षेत्रों का आकार भी Mercator Map की तुलना में ज्यादा वास्तविक नजर आएगा।
Europe और North America दिखेंगे छोटे
नए प्रोजेक्शन का सबसे बड़ा दृश्य प्रभाव उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जो मौजूदा Mercator Map में अपेक्षाकृत बड़े नजर आते हैं। Equal Earth Map में Europe और North America का आकार छोटा दिखाई देगा, क्योंकि इसमें उनके क्षेत्रफल को पृथ्वी के वास्तविक अनुपात के करीब रखा जाता है।
भारत ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय नक्शों में अपनी क्षेत्रीय अखंडता और आधिकारिक सीमाओं को सही तरीके से प्रदर्शित किए जाने की जरूरत पर जोर दिया है। खास तौर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े मानचित्रों को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट है।
अमेरिका ने क्यों किया विरोध?
अमेरिका ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से इसे संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिकताओं से ध्यान हटाने वाला मुद्दा बताया गया है। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि दुनिया को दिखाने के मौजूदा तरीके में लंबे समय से मौजूद भौगोलिक असंतुलन को दूर करने की जरूरत है।
Africa के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
अफ्रीकी देशों के लिए यह मुद्दा केवल नक्शे की तकनीक तक सीमित नहीं है। उनका तर्क है कि पारंपरिक नक्शों में Africa अक्सर अपने वास्तविक आकार की तुलना में छोटा दिखाई देता है। Equal Earth Projection के जरिए महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा संतुलित तरीके से दिखाया जा सकेगा।
क्या Mercator Map पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
ऐसा नहीं है। UN का प्रस्ताव Mercator Projection पर प्रतिबंध नहीं लगाता। समुद्री नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता अब भी बनी हुई है। नए Equal Earth Projection को मुख्य रूप से शिक्षा, मीडिया और सामान्य भौगोलिक प्रस्तुति में बढ़ावा देने की दिशा में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
असल में क्या बदलेगा?
सीधी भाषा में समझें तो दुनिया नहीं बदलेगी, दुनिया का नक्शा देखने का तरीका बदलेगा। भारत, Africa, Europe, अमेरिका या किसी अन्य देश की जमीन का वास्तविक क्षेत्रफल वही रहेगा। केवल नक्शे पर उनका दृश्य आकार पृथ्वी के वास्तविक अनुपात के ज्यादा करीब नजर आएगा।