रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के बीएससी एग्रीकल्चर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। साइबर क्राइम ब्रांच ने मामले में दुर्ग स्थित भारती कॉलेज के प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले कीट विज्ञान का प्रश्नपत्र व्हाट्सऐप पर वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी
परीक्षा से दो घंटे पहले WhatsApp पर वायरल हुआ पेपर
बीएससी एग्रीकल्चर की परीक्षा के दौरान कीट विज्ञान का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से महज दो घंटे पहले सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर वायरल हो गया था। प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी सामने आने के बाद IGKV प्रशासन ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
भारती कॉलेज के प्रोफेसर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार
साइबर क्राइम ब्रांच के DCP ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि जांच के दौरान दुर्ग के भारती कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत योगेश सोन केसरिया, निवासी जबलपुर, की भूमिका सामने आई। पुलिस ने प्रोफेसर समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के मोबाइल फोन सहित अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
11 हजार रुपये में बेचा था 7 अगस्त का प्रश्नपत्र
पुलिस के मुताबिक आरोपी प्रोफेसर ने 7 अगस्त को आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र भी छात्रों को 11 हजार रुपये में बेचा था। जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र हासिल करने के बाद उसे संबंधित छात्रों तक पहुंचाया गया और इसके बदले पैसे लिए गए।
20 अगस्त के पेपर के लिए 12 हजार रुपये वसूले
जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार 20 अगस्त को आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र भी आरोपी प्रोफेसर ने पांच छात्रों को 12 हजार रुपये में बेचा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र लीक करने की पूरी श्रृंखला में कौन-कौन लोग शामिल थे और इससे किसे आर्थिक लाभ हुआ।
एंडोस्कोपी कैमरे से बंद लिफाफे का किया जाता था स्कैन
पुलिस के खुलासे के मुताबिक आरोपी प्रोफेसर ने प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया। मेडिकल कार्यों में इस्तेमाल होने वाले एंडोस्कोपी कैमरे की मदद से बंद लिफाफे में बेहद छोटा छेद किया जाता था। इसके बाद कैमरे के जरिए लिफाफे के अंदर मौजूद प्रश्नपत्र को स्कैन कर लिया जाता था।
स्कैन किए पेपर को हाथ से लिखकर छात्रों तक पहुंचाता था
पुलिस के मुताबिक प्रश्नपत्र को कैमरे से स्कैन करने के बाद आरोपी प्रोफेसर उसे हाथ से लिखता था। इसके बाद संबंधित परीक्षार्थी छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाता था। इसके बदले छात्रों से रकम वसूली जाती थी। इस तरीके से बंद लिफाफे को खोले बिना ही प्रश्नपत्र की जानकारी हासिल कर ली जाती थी।
मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों से खुलेगा पूरा नेटवर्क
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। अब इनकी जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्तर पर लीक हुआ, आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ और प्रश्नपत्र किन-किन छात्रों तक पहुंचा।
जांच आगे बढ़ी तो सामने आ सकते हैं और नाम
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि प्रश्नपत्र लीक करने के बदले आरोपियों को कुल कितनी रकम मिली और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।