मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को राज्य विधानसभा में इतिहास रचने जा रही है। पहली बार बजट बिना किसी मोटी-मोटी किताबों और दस्तावेजों के प्रस्तुत होगा। इस बार वित्त मंत्री अपने हाथों में परंपरागत सूटकेस की जगह टैबलेट लेकर सदन में आएंगे। ई-ऑफिस और ई-कैबिनेट प्रणाली लागू होने के बाद यह परिवर्तन राज्य में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार द्वारा 2026 को कृषि वर्ष घोषित करने के बाद यह उम्मीद भी बढ़ गई है कि बजट में कृषि और किसान हित से जुड़े प्रावधानों को विशेष प्राथमिकता मिलेगी।
पेपरलेस बजट: परंपरा में आधुनिकता का संगम
पेपरलेस बजट का अर्थ केवल कागज की बचत नहीं, बल्कि समूची बजट प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सुगम बनाना है। इस बार केवल वित्त मंत्री का भाषण और एक संक्षिप्त बजट हैंडआउट ही मुद्रित होगा। बाकी सभी दस्तावेज, डेटा शीट, अनुदान और प्रावधान डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। यह कदम प्रशासनिक व्यय में कमी, पर्यावरण संरक्षण और प्रक्रियाओं की सरलता की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।
कृषि वर्ष 2026: बजट में मिलेगी प्राथमिकता
राज्य सरकार ने 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया है, जिससे बजट में कृषि क्षेत्र को अधिक महत्व दिया जाना तय माना जा रहा है। मौसम की चुनौतियों, सिंचाई की जरूरतों, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाओं में अतिरिक्त प्रावधान किए जा सकते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई नई पहल इस बजट में शामिल हो सकती हैं।
नए तरीके: नॉन-बजटरी प्रावधानों की शुरुआत
सरकार इस वर्ष बजट में एक महत्वपूर्ण प्रयोग करने जा रही है। विकास परियोजनाओं और घोषणाओं को निरंतरता देने के लिए ‘नॉन-बजटरी प्रोविजन्स’ का उपयोग किया जाएगा। इसका तात्पर्य है कि राज्य की एजेंसियां, बोर्ड और निगम अपने फंड के माध्यम से विकास कार्यों का खर्च वहन करेंगे। ये प्रावधान सीधे वार्षिक बजट का हिस्सा नहीं होंगे, परंतु वे राज्य की वित्तीय गतिविधियों को प्रभावित करते रहेंगे। इस मॉडल का उद्देश्य परियोजनाओं को तेज़ गति से पूरा करना है।
बढ़ता बजट, पर केंद्र हिस्सेदारी में कमी की चुनौती
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार का बजट आकार बढ़ेगा, हालांकि केंद्र से प्राप्त होने वाले टैक्स शेयर में कमी के कारण यह आकड़ा अनुमान से थोड़ा कम रह सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का बजट 4.21 लाख करोड़ रुपये था, जबकि 2026-27 के लिए लगभग 4.80 लाख करोड़ रुपये का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य 2028 तक बजट को 7.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है, जिसके अनुरूप योजनाओं को आकार दिया जा रहा है।
रोलिंग बजट: भविष्य की नीतियों को दूरदर्शिता का आधार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10 फरवरी को बजट मसौदे को अंतिम रूप देते हुए बताया कि इस बार ‘रोलिंग बजट’ की अवधारणा लागू की जा रही है। इसके तहत 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट तैयार किए जाएंगे, जिनकी प्रत्येक वर्ष समीक्षा और संशोधन होगा। यह मॉडल दीर्घकालिक नीतियों को स्थिरता देता है और उन्हें बदलते आर्थिक परिदृश्य के अनुसार अनुकूलित करने का अवसर प्रदान करता है। सरकार का मानना है कि इससे नीतियां अधिक व्यावहारिक, भविष्य उन्मुख और विकासोन्मुख बनेंगी।