मुंबई। FASTag सिस्टम को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने डिजिटल टोल भुगतान व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई के एक युवक ने दावा किया है कि किसी दूसरे व्यक्ति ने उसकी गाड़ी की जानकारी का इस्तेमाल कर नया FASTag जारी करवा लिया, जिसके बाद उसका असली FASTag अपने आप बंद हो गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर FASTag सिस्टम की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
मुंबई के रुशिल नाम के युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि हाईवे पर टोल भुगतान के दौरान अचानक उनका FASTag काम करना बंद कर गया, जबकि उसमें पर्याप्त बैलेंस मौजूद था। जब उन्होंने कस्टमर केयर से संपर्क किया तो उन्हें पता चला कि उनकी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कर किसी अन्य व्यक्ति ने नया FASTag एक्टिव कर लिया है। सिस्टम में नया FASTag एक्टिव होते ही पुराना FASTag अपने आप इनएक्टिव हो गया।
बिना OTP और अनुमति के कैसे बना नया FASTag?
रुशिल ने आरोप लगाया कि FASTag सिस्टम में बड़ा सुरक्षा लूपहोल मौजूद है। उनका कहना है कि अगर किसी के पास आपकी गाड़ी की आरसी और वाहन की जानकारी है, तो वह अपने मोबाइल नंबर और नाम से नया FASTag जारी करवा सकता है।उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में न तो असली वाहन मालिक से अनुमति ली जाती है और न ही कोई OTP वेरिफिकेशन किया जाता है।
सोशल मीडिया पर बढ़ी चिंता
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर एक ही वाहन नंबर पर दो अलग-अलग लोगों के नाम से FASTag कैसे जारी हो सकता है। लोगों का कहना है कि अगर सिस्टम में ऐसी खामी है तो इसका इस्तेमाल टोल धोखाधड़ी, गलत ट्रांजैक्शन या टैक्स चोरी जैसे मामलों में भी हो सकता है।
कैसे काम करता है FASTag सिस्टम?
FASTag एक इलेक्ट्रॉनिक टोल भुगतान प्रणाली है, जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने लागू किया है। यह RFID तकनीक पर काम करता है, जिससे वाहन बिना रुके टोल प्लाजा पार कर सकते हैं। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है, लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बैंकों और एजेंसियों ने शुरू की जांच
मामला वायरल होने के बाद आईसीआईसीआई बैंक और एयरटेल पेमेंट बैंक ने प्रतिक्रिया दी है। आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और ग्राहक की सहायता की जा रही है। वहीं एयरटेल पेमेंट बैंक ने बताया कि शिकायत की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जा रही है।
अब सख्त हुए वेरिफिकेशन नियम
हाल के दिनों में बढ़ती शिकायतों को देखते हुए FASTag जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त किया गया है। अब वाहन दस्तावेज और डिटेल्स की अधिक सावधानी से जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में वाहन मालिक की अनिवार्य मंजूरी और मजबूत ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू करने की जरूरत है।
वाहन मालिक कैसे रहें सुरक्षित?
विशेषज्ञों ने वाहन मालिकों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
समय-समय पर अपना FASTag स्टेटस जरूर चेक करें।
फर्जी लिंक और संदिग्ध कॉल से बचें।
अपनी आरसी और वाहन की जानकारी अनजान लोगों से साझा न करें।
टोल ट्रांजैक्शन और एसएमएस अलर्ट हमेशा चालू रखें।
संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत बैंक और NHAI से संपर्क करें।