विशाल चतुर्वेदी के लेखन और निर्देशन में बनी आध्यात्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं अलग प्रदर्शन करते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित इस फिल्म ने शुरुआती दिनों में बेहद सीमित दर्शक संख्या के साथ शुरुआत की थी। 7 अगस्त को केवल 25 सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई फिल्म की पहले दिन की कमाई महज 10 लाख रुपये बताई गई। इसके बावजूद धीरे-धीरे दर्शकों की संख्या बढ़ती गई और फिल्म ने अपने प्रदर्शन के 5वें रविवार तक 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया। महज 2 करोड़ रुपये की कथित लागत वाली फिल्म के लिए यह आंकड़ा इसे इस वर्ष की चर्चित बॉक्स ऑफिस सफलता की कहानियों में शामिल करता है।
पहले सप्ताह में कमाई रही बेहद सीमित
फिल्म की शुरुआत देखकर शायद ही किसी को अंदाजा रहा होगा कि आने वाले दिनों में यह इतनी बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल कर सकती है। पहले सप्ताह में ‘हनुमान अंश’ ने लगभग 1.08 करोड़ रुपये का कारोबार किया। दूसरे सप्ताह में इसकी कमाई और घटकर करीब 40 लाख रुपये रह गई, जिससे फिल्म की आगे की यात्रा मुश्किल नजर आने लगी थी। सामान्य तौर पर शुरुआती सप्ताहों में कमजोर प्रदर्शन करने वाली फिल्मों की कमाई तेजी से नीचे चली जाती है और सिनेमाघरों में उनके प्रदर्शन का दायरा भी सीमित हो जाता है। लेकिन ‘हनुमान अंश’ के मामले में कहानी इसके उलट रही। दर्शकों की प्रतिक्रिया और मौखिक प्रचार के चलते फिल्म को धीरे-धीरे नए दर्शक मिलने लगे और तीसरे सप्ताह में इसकी कमाई में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला।
तीसरे सप्ताह में आया जबरदस्त मोड़
फिल्म की बॉक्स ऑफिस यात्रा में तीसरा सप्ताह निर्णायक साबित हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, तीसरे सप्ताह में ‘हनुमान अंश’ ने करीब 10.40 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इतनी बड़ी छलांग ने फिल्म के प्रति दर्शकों की बढ़ती दिलचस्पी को सामने रखा और इसके बाद फिल्म की कमाई का सिलसिला मजबूत बना रहा। फिल्म की खासियत यह रही कि इसकी कहानी का आधार आध्यात्मिक जीवन और आस्था से जुड़ा होने के बावजूद इसे केवल सीमित दर्शक वर्ग तक सीमित नहीं रहना पड़ा। दर्शकों के बीच सकारात्मक चर्चा बढ़ने के साथ फिल्म को लेकर जिज्ञासा भी बढ़ी। इसी मौखिक प्रचार ने कमजोर शुरुआत के बावजूद फिल्म को लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिके रहने का अवसर दिया।
बड़ी फिल्मों के बीच भी कायम रही पकड़
‘हनुमान अंश’ की सफलता को इसलिए भी उल्लेखनीय माना जा रहा है क्योंकि इसके प्रदर्शन के दौरान बड़ी फिल्मों की मौजूदगी रही। फिल्म ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ जैसी चर्चित रिलीज के बीच भी अपनी दर्शक पकड़ बनाए रखी। वहीं ‘टॉक्सिक’ जैसी बड़ी फिल्म की मौजूदगी भी इसके प्रदर्शन को पूरी तरह प्रभावित नहीं कर सकी। आमतौर पर बड़े सितारों और बड़े बजट वाली फिल्मों की रिलीज के बाद छोटी फिल्मों के शो और स्क्रीन तेजी से कम हो जाते हैं। लेकिन ‘हनुमान अंश’ को दर्शकों की निरंतर रुचि का लाभ मिला। रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म के 5वें शुक्रवार का कारोबार भी कई बड़ी हिंदी फिल्मों के उसी चरण के कारोबार से बेहतर रहा, जो इसकी असामान्य बॉक्स ऑफिस यात्रा को रेखांकित करता है।
विशाल चतुर्वेदी की रचनात्मक दृष्टि बनी आधार
फिल्म की कहानी और निर्देशन दोनों की जिम्मेदारी विशाल चतुर्वेदी ने संभाली है। नीम करोली बाबा के जीवन, विचारों और आध्यात्मिक शिक्षाओं को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करना फिल्म के सामने सबसे बड़ी रचनात्मक चुनौती थी। चतुर्वेदी ने इस कथा को केवल जीवनी के रूप में पेश करने के बजाय आध्यात्मिक अनुभव और मानवीय भावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया। फिल्म की बढ़ती लोकप्रियता से संकेत मिलता है कि इस प्रस्तुति ने दर्शकों के एक वर्ग के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित किया। सीमित बजट और शुरुआती कम स्क्रीन के बावजूद फिल्म का लगातार आगे बढ़ना इसके निर्माण से जुड़े लोगों की रचनात्मक सोच और दर्शकों की प्रतिक्रिया के बीच बने संबंध को भी दिखाता है।
आस्था और मौखिक प्रचार ने बदली तस्वीर
‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस कहानी में मौखिक प्रचार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक दिखाई देती है। शुरुआत में फिल्म को व्यापक दर्शक वर्ग नहीं मिला, लेकिन जिन लोगों ने इसे देखा, उनके बीच चर्चा बढ़ने के साथ नए दर्शक सिनेमाघरों तक पहुंचते गए। आध्यात्मिक विषय पर आधारित फिल्मों के लिए दर्शकों का भरोसा और व्यक्तिगत अनुशंसा अक्सर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस फिल्म के साथ भी ऐसा ही रुझान देखने को मिला, जहां शुरुआती सीमित प्रदर्शन के बाद दर्शकों की रुचि लगातार बढ़ी। यही कारण रहा कि बड़ी फिल्मों के दबाव के बावजूद फिल्म लंबे समय तक अपनी जगह बनाए रखने में सफल रही और 30 दिनों के भीतर 100 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंचने का दावा किया गया।
छोटी फिल्म के लिए बड़ी सफलता का संकेत
महज 2 करोड़ रुपये के कथित निर्माण बजट के मुकाबले 100 करोड़ रुपये की बॉक्स ऑफिस कमाई का दावा फिल्म को असाधारण लाभ वाली फिल्मों की श्रेणी में ला सकता है। हालांकि अंतिम व्यावसायिक सफलता का आकलन केवल बॉक्स ऑफिस संग्रह से नहीं, बल्कि वितरण लागत, प्रचार खर्च और निर्माताओं के वास्तविक हिस्से को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसके बावजूद 25 सिनेमाघरों से शुरू होकर इतने बड़े आंकड़े तक पहुंचना अपने आप में फिल्म की दर्शक स्वीकार्यता का संकेत है। ‘हनुमान अंश’ की यात्रा यह भी बताती है कि किसी फिल्म की सफलता हमेशा बड़े बजट, विशाल प्रचार या शुरुआती रिकॉर्ड कमाई पर निर्भर नहीं होती। मजबूत विषय, दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव और सकारात्मक मौखिक प्रचार कई बार सीमित शुरुआत वाली फिल्म को भी लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिकाए रख सकते हैं।