रविवार दोपहर को कोलकाता के नंदन-1 में एक अलग ही माहौल देखने को मिला। प्रसिद्ध फिल्मकार जयव्रत दास की फिल्म ‘द अकैडमी ऑफ फाइन आर्ट्स’ के प्रदर्शन को लेकर दर्शकों में भारी उत्साह नजर आया। यह फिल्म अपने ही शहर में तीसरी बार प्रदर्शित की गई और सभागार दर्शकों से पूरी तरह भरा हुआ दिखाई दिया। लंबे समय से नंदन में फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर कई निर्देशक और कलाकारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। अभिनेत्री और विधायक रूपा गंगोपाध्याय तथा अभिनेता रुद्रनील घोष भी उन कलाकारों में शामिल रहे हैं, जो वर्षों तक नंदन से दूर रहे।
केवल फिल्म प्रदर्शन नहीं, सांस्कृतिक वापसी का भी आयोजन
इस अवसर पर केवल जयव्रत दास की फिल्म ‘प्रत्यावर्तन’ का प्रदर्शन ही नहीं हुआ, बल्कि इसे कला और संस्कृति की वापसी के उत्सव के रूप में भी देखा गया। कार्यक्रम के दौरान शहर में लगातार कम होते सिनेमाघरों, अच्छी फिल्मों की कमी और बंगाली सिनेमा की बदलती स्थिति को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने कहा कि अगर अच्छे सिनेमा को बढ़ावा देना है तो नए सिनेमाघरों की संख्या भी बढ़ानी होगी, ताकि दर्शकों तक गुणवत्तापूर्ण फिल्में आसानी से पहुंच सकें।
टॉलीवुड की ‘प्रतिबंध संस्कृति’ पर रूपा गंगोपाध्याय का बड़ा बयान
पिछले कुछ समय से टॉलीवुड में कलाकारों और तकनीशियनों को विभिन्न कारणों से काम से दूर रखने और अनौपचारिक रूप से प्रतिबंधित करने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। इसी मुद्दे पर अभिनेत्री और विधायक रूपा गंगोपाध्याय ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक बदलाव के बाद यह ‘प्रतिबंध संस्कृति’ पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। रूपा गंगोपाध्याय ने कहा कि अब किसी कलाकार को उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर काम से वंचित नहीं किया जाएगा। कौन-सी फिल्म बनेगी, किस विषय पर बनेगी और उसे कहां दिखाया जाएगा, यह तय करने वाली संस्कृति अब खत्म होनी चाहिए। उनके अनुसार कला और संस्कृति को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना बेहद जरूरी है।
“बंगाली सिनेमा की परंपरा फिर लौटेगी”
रूपा गंगोपाध्याय ने आगे कहा कि बंगाली सिनेमा की पुरानी गौरवशाली परंपरा एक बार फिर लौटेगी। उन्होंने कहा कि नाटक उसी स्वतंत्रता के साथ मंचित होंगे, जैसे पहले हुआ करते थे। कलाकार सरकार की आलोचना भी खुलकर कर सकेंगे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी तरह का दबाव नहीं रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी सभागारों में सभी अच्छी फिल्मों को प्रदर्शन का अवसर मिलेगा और कला को किसी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाएगा।