नई दिल्ली। अफ्रीका के कांगो और युगांडा में फैले इबोला वायरस के नए प्रकोप ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया है। इस बार संक्रमण इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की वजह से फैल रहा है, जिसे बेहद खतरनाक माना जा रहा है। लगातार बढ़ते मामलों और मौतों के बीच भारत समेत कई देशों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले फ्लूइड्स के सीधे संपर्क से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति का खून, उल्टी, पसीना, लार, यूरिन या अन्य बॉडी फ्लूइड्स इस वायरस को फैलाने का कारण बन सकते हैं। संक्रमित कपड़े, बिस्तर और मेडिकल उपकरण भी संक्रमण फैला सकते हैं। हालांकि यह वायरस कोविड-19 की तरह हवा के जरिए तेजी से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर इसका खतरा काफी ज्यादा होता है।
कितना खतरनाक है बुंडीबुग्यो स्ट्रेन?
WHO के अनुसार बुंडीबुग्यो वायरस ऑर्थोइबोलावायरस फैमिली का हिस्सा है और यह इबोला बीमारी का कारण बनता है। इस स्ट्रेन में मृत्यु दर बेहद ज्यादा मानी जाती है। कुछ रिपोर्ट्स में इसकी मौत दर 80 से 90 प्रतिशत तक बताई गई है। अफ्रीका में अब तक इस प्रकोप से कई लोगों की मौत हो चुकी है और संदिग्ध मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि WHO ने इसे गंभीर स्वास्थ्य संकट माना है।
क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण?
डॉक्टरों के अनुसार इबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं। मरीज को तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, शरीर दर्द और गले में खराश हो सकती है। बीमारी बढ़ने पर उल्टी, दस्त, पेट दर्द और शरीर के अंदर व बाहर ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। कई गंभीर मामलों में मरीज की नाक और मसूड़ों से खून बहने लगता है। वायरस दिमाग पर असर डाल सकता है, जिससे मरीज में भ्रम, गुस्सा और असामान्य व्यवहार भी देखने को मिल सकता है।
भारत को कितना खतरा?
भारत में फिलहाल इबोला वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है। डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के मुताबिक इबोला कोविड-19 से अलग है, क्योंकि यह मुख्य रूप से संक्रमित बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क से फैलता है। इसी वजह से इसका संक्रमण सीमित दायरे में रहता है, लेकिन यह ज्यादा जानलेवा साबित हो सकता है।
कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचें और प्रभावित देशों से लौटने वाले लोग कम से कम 21 दिनों तक अपनी सेहत की निगरानी करें। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते पहचान, आइसोलेशन और सख्त निगरानी ही इस वायरस को फैलने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।