रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका गर्मजोशी और भव्य अंदाज में स्वागत किया। ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में आयोजित स्वागत समारोह में रेड कार्पेट, सैन्य बैंड और विशेष सम्मान व्यवस्था ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस मुलाकात को केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं। खास बात यह रही कि यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से जूझ रही है।
यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच बढ़ी नजदीकिया
बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और बाहरी दबावों के बावजूद रूस और चीन के आर्थिक तथा रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस को यूरोप से आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े झटके लगे हैं, जिसके बाद चीन उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी दबावों ने मॉस्को और बीजिंग को पहले से अधिक करीब ला दिया है। यही कारण है कि दोनों देश अब व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।
शी जिनपिंग ने दिया रणनीतिक साझेदारी का संदेश
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इस मुलाकात के दौरान स्पष्ट संकेत दिए कि बीजिंग और मॉस्को के बीच राजनीतिक विश्वास पहले से अधिक मजबूत हुआ है। जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक तालमेल लगातार गहरा हो रहा है और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में दोनों एक-दूसरे के सहयोगी बने रहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार चीन और रूस अब केवल आर्थिक साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में एक-दूसरे के रणनीतिक सहायक के रूप में भी उभर रहे हैं।
ईरान-इजराइल-अमेरिका तनाव पर भी हुई अहम चर्चा
बीजिंग वार्ता में मध्य पूर्व की स्थिति भी प्रमुख मुद्दा रही। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर दोनों नेताओं ने चिंता जताई। शी जिनपिंग ने कहा कि क्षेत्र में युद्ध का विस्तार पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है और व्यापक युद्धविराम बेहद जरूरी है। उन्होंने संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर देते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। माना जा रहा है कि चीन और रूस आने वाले समय में मध्य पूर्व के मुद्दे पर भी संयुक्त रणनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर सकते हैं।
40 बड़े समझौतों पर लग सकती है मुहर
क्रेमलिन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इस दौरे के दौरान रूस और चीन के बीच करीब 40 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। इनमें ऊर्जा, व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक निर्भरता को और मजबूत करना है, ताकि पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक दबावों का असर कम किया जा सके।
‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ परियोजना पर दुनिया की नजर
इस दौरे का सबसे अहम पहलू ‘पावर ऑफ साइबेरिया-2’ गैस पाइपलाइन परियोजना को माना जा रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में रूस की गैस बिक्री में भारी गिरावट आई है, जिसके चलते चीन अब रूस के लिए सबसे बड़ा ऊर्जा बाजार बनता जा रहा है। प्रस्तावित पाइपलाइन के जरिए रूस हर साल भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस चीन भेज सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह परियोजना पूरी तरह आगे बढ़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय शक्ति समीकरणों पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।