नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों में जन्म दर लगातार घट रही है और अब इस गिरावट की वजहों में स्मार्टफोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी शामिल किया जा रहा है। नई रिसर्च रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मोबाइल इंटरनेट और सोशल मीडिया ने लोगों के रिश्तों, सामाजिक व्यवहार और परिवार बढ़ाने की सोच पर गहरा असर डाला है। भारत समेत कई देशों में महिलाओं द्वारा जन्म दिए जाने वाले बच्चों की औसत संख्या लगातार कम हो रही है। भारत में करीब 30 साल पहले जहां महिलाएं औसतन 3.4 बच्चों को जन्म देती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर 2.0 तक पहुंच गया है, जो रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से भी नीचे माना जा रहा है।
जन्म दर घटने के पीछे क्या हैं वजहें?
अब तक विशेषज्ञ महंगाई, महंगे घर, करियर का दबाव, देर से शादी और बदलती सामाजिक सोच को जन्म दर घटने की बड़ी वजह मानते रहे हैं। हालांकि अब रिसर्चर्स यह भी जांच रहे हैं कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने लोगों की निजी जिंदगी और रिश्तों को किस तरह प्रभावित किया है। नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक्नोलॉजी ने सिर्फ बातचीत का तरीका नहीं बदला, बल्कि लोगों की लाइफस्टाइल और परिवार शुरू करने के फैसलों पर भी असर डाला है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी के रिसर्चर्स नाथन हडसन और हर्नान मॉस्कोसो-बोएडो ने अमेरिका और ब्रिटेन में 4जी इंटरनेट शुरू होने के बाद जन्म दर के आंकड़ों का अध्ययन किया। रिसर्च में पाया गया कि जिन इलाकों में हाई-स्पीड मोबाइल इंटरनेट पहले पहुंचा, वहां जन्म दर भी तेजी से गिरने लगी। शोधकर्ताओं का मानना है कि स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं का आमने-सामने मिलना-जुलना कम हुआ और सामाजिक रिश्तों का तरीका बदल गया।
किन देशों में दिखा असर?
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में 2007 के बाद युवाओं और किशोरों में जन्म दर में अचानक गिरावट देखी गई। यही वह दौर था जब स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप्स तेजी से लोकप्रिय हुए। सबसे ज्यादा गिरावट उन्हीं आयु वर्गों में देखी गई, जो सबसे अधिक स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं।
युवा माता-पिता क्यों नहीं बनना चाहते?
फिनलैंड की जनसंख्या विशेषज्ञ अन्ना रोटकिर्च के मुताबिक सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल युवाओं में असुरक्षा और तुलना की भावना बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार दूसरों की “परफेक्ट लाइफ” देखने से आर्थिक दबाव, करियर चिंता और निजी अस्थिरता की भावना बढ़ती है। यही वजह है कि कई युवा खुद को माता-पिता बनने के लिए तैयार नहीं मानते।
विशेषज्ञों ने दी संतुलन बनाने की सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्नोलॉजी पूरी तरह समस्या नहीं है, लेकिन उसका अत्यधिक इस्तेमाल सामाजिक और व्यक्तिगत रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में डिजिटल लाइफ और वास्तविक सामाजिक जीवन के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।