भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि देश की निर्वाचन प्रक्रिया बुरी तरह संदिग्ध होती जा रही है। अब जो रिपोर्ट सामने आई है उससे पता चलता है कि 3 में से 2 चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीने में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के एकतरफा फैसलों पर आधिकारिक रूप से आपत्ति जतायी है।
Form 6 में बदलाव पर भी सवाल
दो चुनाव आयुक्तों ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया के बारे में उन्हें अंधेरे में रखने का आरोप लगाया है। आयुक्तों ने नए युवा वोटर्स को परेशान करने का भी आरोप लगाया है।दो चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म 6 में बदलाव को अनाधिकृत और ग़ैरक़ानूनी बताया है।इसका सीधा मतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले ही सारे फैसले ले रहे हैं।
SIR और 13 करोड़ नामों का मुद्दा
हमारे नेता राहुल गांधी ने सबसे पहले चुनाव आयोग के काम में पारदर्शिता के अभाव और वोट चोरी का मामला तथ्यों के साथ उजागर किया था। उसके बाद देश में शुरू हुई SIR में अब तक करीब 13 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से काटे जा चुके हैं।इस रिपोर्ट से साफ़ हो गया है कि भारतीय लोकतंत्र अपने सबसे संकटकालीन दौर में पहुंच गया है। जिस निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया को ईमानदारी से अमल में लाने के लिए बनाया गया था, वही आयोग निर्वाचन प्रक्रिया को जनविरोधी और सत्ताधारी दल के अनुकूल बना रहा है।