भोपाल. मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों को लेकर लंबे समय से जारी इंतजार अब खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली कैबिनेट बैठक में तबादला नीति-2026 को मंजूरी मिल गई है। सूत्रों के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग ने नई तबादला नीति का मसौदा तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजा था। अबप्रदेश में तबादलों पर लगी रोक हट जाएगी और बड़े पैमाने पर ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू होंगी।
ऑनलाइन प्रक्रिया से होंगे पारदर्शी तबादले
राज्य सरकार इस बार तबादला प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार कर्मचारियों और अधिकारियों को ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित हो सके। सरकार का उद्देश्य मनमानी और विवादों को कम करते हुए ट्रांसफर व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से कर्मचारियों को भी बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
दो स्तर पर किए जाएंगे अधिकारियों के ट्रांसफर
राज्य सरकार आमतौर पर दो अलग-अलग स्तरों पर तबादलों की प्रक्रिया संचालित करती है। पहले स्तर पर उन अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया जाता है, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। वहीं दूसरे स्तर में ऐसे अधिकारी आते हैं, जिनकी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं या जिन पर प्रशासनिक सवाल उठते रहे हैं। इसके अतिरिक्त कई कर्मचारी व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से स्वेच्छा से भी तबादले के लिए आवेदन करते हैं। नई नीति में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर व्यवस्था तैयार की जा रही है।
मंत्रियों को मिल सकते हैं विशेष अधिकार
सूत्रों के मुताबिक नई तबादला नीति में विभागीय मंत्रियों और प्रभारी मंत्रियों की भूमिका भी स्पष्ट रूप से तय की जाएगी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार विभागीय मंत्री को एक जिले से दूसरे जिले में तबादला करने का अधिकार दिया जा सकता है, जबकि प्रभारी मंत्रियों को जिले के भीतर स्थानांतरण की अनुमति मिलेगी। कुछ विशेष मामलों में आवेदन पहले विभाग प्रमुखों के पास भेजे जाएंगे और उसके बाद उन्हें संबंधित मंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इससे निर्णय प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
पिछले वर्ष पहली बार बढ़ाया गया था दायरा
पिछले वर्ष राज्य सरकार ने 1 मई से तबादलों की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें पहली बार चार अलग-अलग स्लैब बनाए गए थे। उस दौरान तबादलों का दायरा भी बढ़ाकर 2 से 3 प्रतिशत तक किया गया था। सरकार का मानना था कि इससे प्रशासनिक संतुलन बेहतर होगा और विभिन्न विभागों में कार्यक्षमता बढ़ेगी। अब माना जा रहा है कि नई नीति में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को राहत मिल सकती है।
कर्मचारियों में बढ़ी उम्मीद और हलचल
कैबिनेट बैठक से पहले ही प्रदेश के विभिन्न विभागों में तबादलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारी नई नीति के लागू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं कई अधिकारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने पहले से ही अपने पसंदीदा स्थानों पर तबादले के लिए तैयारी शुरू कर दी है। यदि सरकार आज बड़ा फैसला लेती है, तो आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिल सकता है।