नई दिल्ली। सड़क हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब सड़कों पर बने गड्ढों, खुले नालों, मैनहोल और जलभराव वाले इलाकों में बैरिकेडिंग करना अनिवार्य होगा। समिति ने राज्यों से कहा है कि किसी भी खतरनाक जगह की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। निर्देशों में साफ कहा गया है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों में पर्याप्त लाइटिंग, रिफ्लेक्टिव टेप और मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि रात में सड़क हादसे रोके जा सकें।
खुले मैनहोल और जलभराव पर विशेष सख्ती
समिति ने कहा है कि खुले नाले, मैनहोल और बिना सुरक्षा वाले जलभराव क्षेत्र लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। कई हादसों में लोगों की मौत और गंभीर चोटें सामने आई हैं। इसी वजह से अब स्थानीय प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। अगर किसी राज्य में लापरवाही पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
पांच साल के हादसों का डेटा भी मांगा
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने राज्यों से पिछले पांच वर्षों में गड्ढों और खराब सड़कों के कारण हुए हादसों का पूरा डेटा मांगा है। इसके अलावा खुले जलभराव और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में हुई मौतों और घायलों की जानकारी भी मांगी गई है। जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के आदेश दिए गए हैं। समिति का कहना है कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश
इससे पहले साल 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी ने सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दिए थे। इनमें हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना, स्पीड मॉनिटरिंग, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का ऑडिट और स्कूल वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था। अब बारिश के मौसम को देखते हुए एक बार फिर राज्यों को सख्ती से सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।