नई दिल्ली. देश की सबसे महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं में शामिल अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत में बड़ी बढ़ोतरी का अनुमान सामने आया है। 508 किमी लंबे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए शुरुआती लागत करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन संशोधित अनुमान लगभग 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही जा रही है। यानी परियोजना का अनुमानित बजट लगभग दोगुना हो गया है। लागत में बढ़ोतरी के पीछे परियोजना में हुई समय संबंधी देरी, जमीन अधिग्रहण और अन्य तकनीकी तथा प्रशासनिक कारणों को प्रमुख माना जा रहा है। इतने बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट में समय बढ़ने के साथ निर्माण सामग्री, तकनीक और अन्य संसाधनों की लागत पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है।
अगस्त 2027 में पहले हिस्से को शुरू करने की योजना
अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार कॉरिडोर के पहले हिस्से को अगस्त 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पूरी परियोजना के 2030 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। परियोजना के पूरा होने के बाद अहमदाबाद और मुंबई के बीच तेज गति वाली रेल सेवा शुरू होगी, जो देश के परिवहन ढांचे में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है। हालांकि इतने बड़े और जटिल प्रोजेक्ट में निर्धारित समयसीमा को बनाए रखना निर्माण की प्रगति, तकनीकी तैयारियों और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
संशोधित लागत प्रस्ताव को लेकर बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक 508 किमी लंबे कॉरिडोर की संशोधित लागत के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। हालांकि कैबिनेट स्तर पर लिए गए किसी अंतिम निर्णय की आधिकारिक जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आने तक संशोधित बजट को अंतिम मंजूरी के रूप में नहीं देखा जा सकता। शुरुआती अनुमान 1.1 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आने के बाद अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता पर भी चर्चा तेज हो गई है। यदि संशोधित लागत को औपचारिक मंजूरी मिलती है तो रेल मंत्रालय को परियोजना के लिए अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करनी होगी।
महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण बना बड़ी चुनौती
परियोजना की लागत और समयसीमा पर असर डालने वाले प्रमुख कारणों में महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण में लगी लंबी अवधि को शामिल किया जा रहा है। अहमदाबाद से मुंबई तक फैले इस विशाल कॉरिडोर के लिए विभिन्न क्षेत्रों में भूमि की आवश्यकता थी और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी से परियोजना की समग्र गति प्रभावित हुई। इसके अलावा आवश्यक मंजूरियों और अन्य प्रक्रियागत औपचारिकताओं में समय लगने से भी निर्माण कार्यक्रम पर असर पड़ा। किसी बड़े रेल कॉरिडोर में भूमि, पर्यावरण, तकनीकी मंजूरी और स्थानीय स्तर की प्रक्रियाएं परियोजना की गति को सीधे प्रभावित करती हैं।
ट्रेन सेट की देरी ने भी बढ़ाया दबाव
हाई-स्पीड रेल सेवा के लिए आवश्यक ट्रेन सेट की उपलब्धता और उन्हें अंतिम रूप देने में हुई देरी को भी लागत बढ़ने के कारणों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार परियोजना के लिए हाई-स्पीड ट्रेनें भारत में निर्मित किए जाने की योजना है और एक ट्रेन की लागत करीब 390 करोड़ रुपये से 400 करोड़ रुपये के बीच होने का अनुमान बताया गया है। अत्याधुनिक तकनीक, विशेष सुरक्षा मानक और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए आवश्यक विशेष उपकरणों के कारण इस परियोजना का तकनीकी ढांचा सामान्य रेल परियोजनाओं से काफी अलग है। इसलिए ट्रेन निर्माण और तकनीकी एकीकरण की प्रक्रिया परियोजना की अंतिम समयसीमा के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
जनवरी में भी सामने आया था लागत बढ़ने का अनुमान
इससे पहले जनवरी में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने परियोजना की लागत में बड़ी वृद्धि का संकेत दिया था। उस समय लागत लगभग 83% बढ़कर करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई थी। अब संशोधित अनुमान करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की चर्चा ने यह स्पष्ट किया है कि देरी का वित्तीय असर लगातार बढ़ता गया है। जमीन अधिग्रहण, जरूरी मंजूरियां, निर्माण की समयसीमा और हाई-स्पीड ट्रेनों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जैसे कारकों ने परियोजना के खर्च और क्रियान्वयन की गति दोनों को प्रभावित किया है।
जापान की JICA फंडिंग और अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत
परियोजना के वित्तपोषण में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी यानी JICA की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब तक करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग JICA और बजटीय आवंटन के माध्यम से होने की बात कही गई है। यदि परियोजना की कुल संशोधित लागत करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचती है तो शेष राशि के लिए अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था करनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार अतिरिक्त फंड बजटीय प्रावधान के जरिए उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है। परियोजना की अंतिम वित्तीय संरचना और संशोधित लागत पर सरकार के आधिकारिक फैसले के बाद ही पूरा खाका स्पष्ट हो सकेगा।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन के सामने समय और लागत की चुनौती
अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना भारत के हाई-स्पीड रेल भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। एक ओर इसका लक्ष्य आधुनिक परिवहन व्यवस्था, तेज यात्रा और नई रेल तकनीक को देश में स्थापित करना है, वहीं दूसरी ओर लागत में बढ़ोतरी और परियोजना की समयसीमा चुनौती बनी हुई है। अगस्त 2027 में पहले चरण को शुरू करने और 2030 तक पूरे कॉरिडोर को पूरा करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। आने वाले वर्षों में निर्माण की गति, ट्रेन सेट की उपलब्धता, वित्तीय मंजूरी और तकनीकी कार्यों की प्रगति तय करेगी कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन तय समय पर यात्रियों के लिए दौड़ पाती है या नहीं।