Amit Shah Drug Free India: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत को वर्ष 2029 तक ड्रग्स फ्री बनाने का लक्ष्य तय किए जाने की जानकारी दी है। रविवार को गोवा के डोना पाउला में नशे के खिलाफ सरकार की रणनीति और अब तक की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ड्रग्स की समस्या को केवल अपराध या कानून-व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। अमित शाह ने कहा कि नशीले पदार्थों के कारोबार से मिलने वाला पैसा आतंकवाद को बढ़ावा देने में इस्तेमाल हो सकता है। इसी कारण केंद्र सरकार ने नशे के खिलाफ लड़ाई को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सरकार अब ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को अलग-अलग एजेंसियों तक सीमित रखने के बजाय इसे देशव्यापी अभियान के रूप में आगे बढ़ा रही है।
2019 में तैयार हुई चार-स्तरीय व्यवस्था
अमित शाह के अनुसार, वर्ष 2019 में नारको कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी NCORD के तहत चार स्तरीय व्यवस्था तैयार की गई थी। इसका उद्देश्य केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर काम करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इसके तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष नशा विरोधी कार्यबल तैयार करने का मॉडल भी साझा किया गया। केंद्र और राज्य की एजेंसियों को एक साथ जोड़कर ड्रग्स से जुड़े मामलों में समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य जांच और कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क को अलग-अलग स्तर पर ट्रैक किया जा सके।
मानस हेल्पलाइन 1933 और राष्ट्रीय डेटाबेस की व्यवस्था
नशे से प्रभावित लोगों की मदद के लिए सरकार ने मानस हेल्पलाइन 1933 शुरू की है। इसके साथ ही ड्रग्स से जुड़े अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस भी तैयार किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर जानकारी उपलब्ध होने से विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और संदिग्ध नेटवर्क की पहचान में मदद मिलने की उम्मीद है।
छोटी बरामदगी से पूरे नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच
ड्रग्स की तस्करी से जुड़े मामलों की जांच को लेकर अमित शाह ने दो स्तरों वाली रणनीति की जानकारी दी। उनके मुताबिक, यदि किसी स्थान से नशीले पदार्थों का छोटा पैकेट भी बरामद होता है तो जांच केवल उस बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगी। उसके पीछे मौजूद सप्लाई नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। वहीं सीमा पर यदि नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़ी जाती है तो जांच एजेंसियां उसके आगे के रास्ते और पूरे नेटवर्क की पड़ताल करेंगी। इसका उद्देश्य ड्रग्स की केवल जब्ती करने के बजाय उसके पीछे काम करने वाले पूरे तंत्र को पकड़ना है।
डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी पर भी सरकार की नजर
नशे के कारोबार में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार ने अपनी रणनीति तैयार की है। अमित शाह ने बताया कि वित्तीय लेनदेन की जांच के साथ डार्कनेट, एन्क्रिप्टेड बातचीत और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले कथित कारोबार पर भी नजर रखी जा रही है। इसके अलावा नशीले पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और सिंथेटिक ड्रग्स की रोकथाम के लिए भी अलग व्यवस्था विकसित की गई है। इस रणनीति का फोकस पारंपरिक तस्करी के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों से संचालित होने वाले नेटवर्क की पहचान पर भी है।
36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत लाने का दावा
गृह मंत्री ने विदेश भाग चुके अपराधियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के आंकड़े भी साझा किए। अमित शाह के मुताबिक, 2019 से जुलाई 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत लाया गया है। इनमें आर्थिक अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी और गैंगवार से जुड़े आरोपी शामिल बताए गए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस पर काम किया गया। वहीं जुलाई 2026 तक इस साल 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
भगोड़ों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई
अमित शाह ने भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारत-पोल व्यवस्था का भी उल्लेख किया। इस व्यवस्था में 14 से अधिक केंद्रीय एजेंसियों और सभी राज्यों की पुलिस को जोड़ा गया है। गृह मंत्री के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच भगोड़ों से जुड़ी करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति सील की गई है। इससे साफ है कि सरकार की रणनीति केवल आरोपियों को देश वापस लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क और संपत्तियों पर कार्रवाई को भी इसका हिस्सा बनाया गया है।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद पर भी बोले शाह
अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने आतंकवाद और अलगाववाद में कमी का दावा करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा है। हालांकि, ये आंकड़े और आकलन गृह मंत्री द्वारा अपने संबोधन में रखे गए दावों पर आधारित हैं।
नक्सलवाद खत्म होने की दिशा में बढ़ने का दावा
नक्सलवाद को लेकर भी अमित शाह ने कहा कि पांच दशक पुरानी समस्या अब समाप्त होने की दिशा में है। इसके अलावा उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में करीब 10 हजार युवाओं के हथियार छोड़ने और 14 से अधिक समझौतों का भी उल्लेख किया। गृह मंत्री ने इन घटनाक्रमों को देश में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति में बदलाव के संकेत के तौर पर पेश किया।
गोवा पुलिस की सजा दर बढ़ने का भी किया जिक्र
अमित शाह ने गोवा पुलिस के कामकाज की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि तीन नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद गोवा में मामलों में सजा की दर 22 प्रतिशत से बढ़कर 53.2 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने इसे आपराधिक न्याय व्यवस्था में हो रहे बदलावों के संदर्भ में पेश किया और गोवा पुलिस के प्रयासों की तारीफ की।
2029 का लक्ष्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती
2029 तक भारत को ड्रग्स फ्री बनाने का लक्ष्य केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगा। इसके लिए तस्करी के नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, डिजिटल माध्यमों, सिंथेटिक ड्रग्स और निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों पर भी लगातार निगरानी की जरूरत होगी। अमित शाह के बयान से संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार ड्रग्स के खिलाफ अभियान को कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठित अपराध के खिलाफ व्यापक लड़ाई के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।