जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने 4 चुनावी राज्यों के लिए दूसरे चरण के कार्यक्रम में बदलाव किया है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में अब जनगणना का दूसरा चरण निर्धारित समय से पहले कराया जाएगा। इन राज्यों में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनगणना का काम पूरा करने का कार्यक्रम तय किया गया है। पहले इन राज्यों में भी देश के अन्य हिस्सों की तरह 1 फरवरी 2027 से दूसरा चरण शुरू होना था। लेकिन फरवरी के आसपास विधानसभा चुनाव की संभावित प्रक्रिया को देखते हुए कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। इस निर्णय से चुनावी प्रक्रिया और जनगणना के काम को एक-दूसरे से अलग रखते हुए दोनों बड़े प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने का प्रयास किया गया है।
विधानसभा चुनाव के समय से टकराव रोकने की तैयारी
जनगणना के दूसरे चरण और विधानसभा चुनावों के संभावित कार्यक्रम के बीच टकराव की स्थिति न बने, इसके लिए राज्यों में जनगणना पहले कराने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन 4 राज्यों में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसी अवधि में जनगणना का दूसरा चरण भी प्रस्तावित था। ऐसे में एक ही समय पर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और चुनावी जिम्मेदारियों के सामने आने की संभावना थी। जनगणना का काम पहले पूरा कराने से सरकारी मशीनरी को चुनावी प्रक्रिया के दौरान अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता मिल सकेगी। इससे यह संकेत भी मिलता है कि जनगणना के कारण इन राज्यों में विधानसभा चुनावों के समय या कार्यक्रम में बदलाव करने की आवश्यकता नहीं होगी।
उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी चुनावी कवायद
उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होना है। राज्य में पिछली विधानसभा के चुनाव 10 फरवरी से 7 मार्च 2022 के बीच 7 चरणों में कराए गए थे। देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में विधानसभा चुनाव अपने विशाल प्रशासनिक दायरे के कारण पहले से ही बड़ी चुनौती होते हैं। सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की तैयारी, निर्वाचन कर्मियों की तैनाती और मतदाता सूची से जुड़े कार्यों के साथ चुनाव आयोग को व्यापक स्तर पर तैयारी करनी होती है। ऐसे में जनगणना का काम चुनावी अवधि से पहले पूरा कराने का निर्णय प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में जनगणना का कार्यक्रम पहले करने से आगामी चुनावों की तैयारियों के लिए भी पर्याप्त प्रशासनिक क्षमता उपलब्ध रहने की उम्मीद है।
उत्तराखंड में कुंभ के कारण भी चुनौती
उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त होगा। राज्य में पिछली बार विधानसभा चुनाव 14 फरवरी 2022 को एक ही चरण में कराया गया था। आगामी चुनाव में विधानसभा कार्यकाल की समयसीमा के साथ-साथ राज्य में होने वाले धार्मिक आयोजन भी प्रशासनिक तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से कुंभ से जुड़ी व्यापक व्यवस्थाओं के कारण सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती पर अतिरिक्त दबाव रहने की संभावना है। ऐसे में जनगणना को दिसंबर और जनवरी में पहले ही पूरा कराने से चुनाव और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान प्रशासनिक संसाधनों पर एक साथ पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
पंजाब और गोवा में भी समय से पहले जनगणना
पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक है, जबकि गोवा विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च 2027 को समाप्त होगा। दोनों राज्यों में पिछली बार विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराए गए थे। पंजाब में 20 फरवरी 2022 को मतदान हुआ था, जबकि गोवा में 14 फरवरी 2022 को विधानसभा चुनाव कराया गया था। ऐसे में फरवरी 2027 में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना के बीच जनगणना का दूसरा चरण चलाना प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता था। दोनों राज्यों में दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच जनगणना कराने का फैसला इसी संभावित टकराव को पहले ही दूर करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
मणिपुर का मामला क्यों अलग है
मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल भी मार्च 2027 में समाप्त होना है और राज्य में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि, वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार मणिपुर में जनगणना का काम इन 4 राज्यों की तरह पहले नहीं कराया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि मणिपुर को लेकर चुनावी प्रक्रिया और जनगणना कार्यक्रम का प्रबंधन अलग परिस्थितियों में किया जाएगा। 4 राज्यों में जनगणना को आगे बढ़ाने के फैसले से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि चुनावी प्रक्रिया को निर्धारित संवैधानिक समयसीमा के भीतर संचालित करने के लिए प्रशासनिक योजना में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। जनगणना कार्यक्रम में संशोधन इसी व्यापक समन्वय का हिस्सा है।
फरवरी 2027 से बाकी देश में शुरू होगा दूसरा चरण
उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा को छोड़कर देश के अन्य हिस्सों में जनगणना 2027 के दूसरे चरण की शुरुआत पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार 1 फरवरी 2027 से होगी। इस तरह देशव्यापी जनगणना की मूल समय-सारणी को पूरी तरह बदलने के बजाय चुनावी राज्यों के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। इसका उद्देश्य जनगणना जैसी विशाल प्रशासनिक प्रक्रिया और विधानसभा चुनाव जैसी संवैधानिक प्रक्रिया के बीच आवश्यक समन्वय बनाए रखना है। पहले चरण के तहत मकानों और आवासीय स्थिति से संबंधित जानकारी जुटाने का काम 2026 में किया जाना है, जबकि दूसरे चरण में आबादी से संबंधित विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे। चुनावी राज्यों में दूसरे चरण को पहले पूरा कराने से दोनों प्रक्रियाओं के बीच संभावित टकराव को काफी हद तक टालने की कोशिश की गई है।