नई दिल्ली: देश के कामकाजी वर्ग के स्वास्थ्य और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय श्रम मंत्रालय (Labour Ministry) ने एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा की है। मंत्रालय द्वारा जारी की गई नई अधिसूचना के तहत अब कोई भी नियोक्ता (मालिक या कंपनी) अपने किसी भी कर्मचारी से लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं करा सकता है। 5 घंटे पूरे होने से पहले कर्मचारी को कम से कम 30 मिनट का विश्राम (रेस्ट ब्रेक) देना अनिवार्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने सभी निजी और सरकारी संस्थानों, कंपनियों और नियोक्ताओं को इस नियम की याद दिलाते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं। यह अधिसूचना कार्यस्थल (वर्कप्लेस) के माहौल को सुधारने और कर्मचारियों के कल्याण को सुनिश्चित करने के पुराने नियमों को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाई गई है।
भूमिगत खदान श्रमिकों के लिए अधिकतम 8 घंटे की शिफ्ट
श्रम मंत्रालय ने इस अधिसूचना में सबसे अधिक शारीरिक श्रम और जोखिम वाले क्षेत्रों में से एक, यानी भूमिगत खदानों (Underground Mines) में काम करने वाले श्रमिकों के लिए भी नियमों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है: खदान के भीतर काम करने वाले श्रमिकों की कोई भी शिफ्ट 8 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। श्रम सुरक्षा नियमावली के तहत पारंपरिक रूप से भूमिगत श्रमिकों के काम के घंटे, प्रबंधन और विश्राम के अंतराल पर सख्त नियंत्रण रखने की बात दोहराई गई है। पुराने श्रम नियमों और कारखाना अधिनियमों (Factories Act) में भी शिफ्ट के बीच ब्रेक को अनिवार्य माना गया था ताकि अत्यधिक थकान के कारण होने वाले कार्यस्थल हादसों और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके।
क्यों पड़ी इस नई अधिसूचना की जरूरत?
हाल ही में देश में पेश किए गए नए श्रम कोड (Labour Codes) के कुछ हिस्सों में विश्राम और अनिवार्य ब्रेक के विस्तृत ढांचे को लेकर स्पष्टता की कमी देखी जा रही थी, जो कि पुराने नियमों में हुआ करती थी। इसके चलते देश के विभिन्न श्रमिक संगठनों और मजदूर प्रतिनिधियों के बीच यह चिंता बढ़ गई थी कि यदि सरकार अलग से स्पष्ट निर्देश जारी नहीं करेगी, तो कंपनियों से अनिवार्य ब्रेक और सुरक्षित कामकाजी माहौल के नियमों को लागू करवाना कठिन हो जाएगा नए श्रम ढांचे (Labour Framework) की ओर बढ़ते कदम के बीच, कर्मचारियों के मौजूदा कल्याणकारी अधिकारों और सुरक्षा को हर हाल में बनाए रखने के प्रयास के रूप में इस नई अधिसूचना को देखा जा रहा है स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोपरि: श्रम मंत्रालय का मानना है कि लगातार कई घंटों तक काम करने से न सिर्फ कर्मचारियों की उत्पादकता (Productivity) प्रभावित होती है, बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इसी वजह से 5 घंटे के भीतर आधे घंटे का ब्रेक अनिवार्य किया गया है।