नई दिल्ली. देश के न्यायिक ढांचे में शनिवार को बड़ा बदलाव हुआ, जब 8 उच्च न्यायालयों के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई। कानून एवं न्याय मंत्रालय ने इन नियुक्तियों की जानकारी सार्वजनिक की। नियुक्तियां संविधान के तहत राष्ट्रपति द्वारा, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद की गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने पहले इन नामों की सिफारिश की थी, जिसके बाद केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी हुई। इस बदलाव से पटना, कलकत्ता, मुंबई, राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालयों के शीर्ष न्यायिक नेतृत्व में परिवर्तन हुआ है।
पटना और कलकत्ता उच्च न्यायालय को नया नेतृत्व
दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति वल्लुरी कामेश्वर राव को पटना उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इसी क्रम में मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे को कलकत्ता उच्च न्यायालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थायी नेतृत्व को लेकर न्यायिक प्रशासन की निरंतरता महत्वपूर्ण थी। कॉलेजियम ने 6 अगस्त 2026 को इन दोनों नामों सहित 4 उच्च न्यायालयों के लिए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की थी। बाद में राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ यह प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हुई।
राजस्थान और मुंबई में भी बदले मुख्य न्यायाधीश
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। वहीं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी को मुंबई उच्च न्यायालय की कमान सौंपी गई है। न्यायमूर्ति त्रिपाठी की नियुक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुंबई उच्च न्यायालय देश के सबसे पुराने और प्रमुख उच्च न्यायालयों में शामिल है। दूसरी ओर राजस्थान उच्च न्यायालय को भी अब स्थायी मुख्य न्यायाधीश का नेतृत्व मिलेगा। इन नियुक्तियों से दोनों उच्च न्यायालयों के प्रशासनिक और न्यायिक संचालन में नई व्यवस्था की शुरुआत होगी।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को इसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। न्यायमूर्ति मिश्रा पहले से ही इस उच्च न्यायालय में कार्यरत हैं और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबे समय तक न्यायिक दायित्व निभाया था और बाद में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय स्थानांतरित हुए। उनके नाम की सिफारिश भी सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम की 6 अगस्त की बैठक में की गई थी। अब नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना के बाद उन्हें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी मिली है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में भी नई जिम्मेदारी
गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वहीं ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। दोनों नियुक्तियां 31 अगस्त 2026 को कॉलेजियम की ओर से की गई अतिरिक्त सिफारिशों के बाद हुईं। इससे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालयों को भी नियमित शीर्ष न्यायिक नेतृत्व मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इन नियुक्तियों का असर संबंधित उच्च न्यायालयों के प्रशासन, लंबित मामलों की निगरानी और न्यायिक कार्यप्रणाली के समन्वय पर भी देखने को मिल सकता है।
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय की भी बदली कमान
राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति ऐसे न्यायिक क्षेत्र में हुई है, जहां संवैधानिक, प्रशासनिक और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों का विशेष महत्व रहता है। न्यायमूर्ति भाटी के अनुभव से इस उच्च न्यायालय के कामकाज को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है। उनके साथ ही राजस्थान उच्च न्यायालय को भी न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल के रूप में नया मुख्य न्यायाधीश मिला है। इस तरह दोनों उच्च न्यायालयों में नेतृत्व परिवर्तन एक ही नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा बना है।
कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद पूरी हुई प्रक्रिया
इन 8 नियुक्तियों की पृष्ठभूमि में सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम की दो चरणों में हुई सिफारिशें महत्वपूर्ण रही हैं। 6 अगस्त 2026 को कॉलेजियम ने पटना, कलकत्ता, मुंबई तथा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालयों के लिए 4 नामों की सिफारिश की थी। इसके बाद 31 अगस्त को राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालयों के लिए 4 और नामों की सिफारिश की गई। शनिवार, 5 सितंबर को केंद्र ने इन सभी नियुक्तियों की अधिसूचना जारी कर दी। इस प्रकार देश के 8 प्रमुख उच्च न्यायालयों के शीर्ष न्यायिक नेतृत्व में एक साथ व्यापक बदलाव की प्रक्रिया पूरी हुई।