नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने मंगलवार को उन पांच राज्यों को बड़ा निर्देश जारी किया जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ये राज्य हैं गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड। आयोग ने चुनाव कार्यों से सीधे जुड़े कुछ श्रेणियों के अधिकारियों का तबादला करने को कहा है। हाल ही में इन पांच राज्यों सहित 17 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष सारांश पुनरीक्षण का आदेश देते हुए आयोग ने कहा था कि इन पांच राज्यों में चुनाव अगले साल की शुरुआत में हो सकते हैं। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले अधिकारियों का तबादला करना आयोग की सामान्य प्रक्रिया है।
किन अधिकारियों पर लागू होगा नियम
आयोग के निर्देश के अनुसार जो अधिकारी अपने गृह जिलों में तैनात हैं या जिन्होंने पिछले चार वर्षों में किसी जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं उन्हें वहां से हटाकर दूसरी जगह तैनात किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के मामले में 31 मई 2027 तक तीन साल पूरे करने वाले अधिकारी भी इसमें शामिल हैं। इस आदेश के दायरे में जिला चुनाव अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी जैसे जिला स्तरीय अधिकारी आते हैं। संभागीय और नगर आयुक्त भी इसमें शामिल हैं।
पुलिस और अन्य विभाग के अधिकारी
उप-निरीक्षक से लेकर रेंज अतिरिक्त महानिदेशक और महानिरीक्षक स्तर तक के पुलिस अधिकारी भी इस आदेश के दायरे में हैं। आबकारी और परिवहन विभाग के उप-निरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी भी तबादले के दायरे में आएंगे। चुनाव आयोग का उद्देश्य इन महत्वपूर्ण पदों पर लंबे समय से तैनात अधिकारियों को हटाकर निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। गृह जिले में तैनाती या लंबे समय तक एक जगह रहने से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है इसलिए यह कदम उठाया गया है।
किन्हें मिलेगी छूट
राज्य मुख्यालयों में तैनात अधिकारियों को इस आदेश से छूट दी गई है। चुनाव कार्यों से न जुड़े कर्मचारियों जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षकों को भी इससे बाहर रखा गया है। केवल वे अधिकारी प्रभावित होंगे जो सीधे चुनाव प्रक्रिया से जुड़े हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने की दिशा में है। राज्यों को शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
विधानसभाओं का कार्यकाल और चुनाव का समय
उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है। मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के प्रावधान चुनाव आयोग को यह अधिकार देते हैं कि वह कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव करा सकता है। इसलिए इन राज्यों में जल्दी चुनाव की संभावना को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी गई है।
निष्पक्ष चुनाव की दिशा में कदम
चुनाव आयोग का यह निर्देश निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। लंबे समय से एक जगह तैनात अधिकारियों को हटाने से स्थानीय प्रभाव कम होता है। गृह जिले में तैनाती पर रोक से भी निष्पक्षता बढ़ती है। राज्यों को निर्देश का पालन करते हुए तबादले पूरे करने होंगे। मतदाता सूची के विशेष सारांश पुनरीक्षण के साथ यह कदम 2027 के चुनावों की तैयारी को तेज करता है। आयोग चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर दे रहा है।