संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर देशसेवा का संकल्प लेकर प्रशासनिक सेवा में शामिल होने वाले IAS अधिकारी जब ‘रक्षक से भक्षक’ बन जाएं, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। IAS पद्मा जयसवाल पर लाखों रुपये की हेराफेरी, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और प्रशासनिक फंड के गलत इस्तेमाल सहित गंभीर आरोप सामने आए हैं।
कौन हैं पद्मा जयसवाल?
2003 बैच की अरुणाचल-गोवा-मिजोरम-यूनियन टेरिटरी (AGMUT) कैडर की IAS अधिकारी पद्मा जयसवाल हाल के समय में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में रहीं। लगभग 23 वर्षों तक डिप्टी कमिश्नर से लेकर विभिन्न मंत्रालयों में सचिव और कई उच्च प्रशासनिक पदों पर कार्य करने के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
क्या थे उनके खिलाफ आरोप?
अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में डिप्टी कमिश्नर रहते हुए वर्ष 2007–2008 में उन पर सरकारी राजस्व के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे। साथ ही पद का दुरुपयोग कर करीबी रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदने के भी आरोप सामने आए। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने सरकारी जमीन और धन का गलत इस्तेमाल किया। उनके खिलाफ लगभग 28 लाख रुपये की वित्तीय हेराफेरी के आरोप भी दर्ज हुए।
जांच और कानूनी प्रक्रिया
फरवरी 2008 में गृह मंत्रालय ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान उन्हें सेवा से हटाया भी गया, लेकिन बाद में बहाल कर दिया गया। इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई, जहां कई नए खुलासे सामने आए। जांच में उनके विभाग के कोषाध्यक्ष और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया
मामला 2009 में दर्ज होने के बावजूद अदालत का अंतिम फैसला आने में लगभग 17 साल लग गए। CAT ने प्रारंभिक रूप से मामले को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। अंततः 1 अप्रैल को अदालत ने केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया।
बर्खास्तगी की प्रक्रिया
फैसले के बाद गृह मंत्रालय ने उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश की। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) ने इस पर मुहर लगाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद्मा जयसवाल की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया।
करियर प्रोफाइल
पद्मा जयसवाल का जन्म 6 अक्टूबर 1975 को चंडीगढ़ में हुआ था। उन्होंने बी.कॉम, मैनेजमेंट और कंपनी मैनेजमेंट की डिग्री हासिल कर 2003 में IAS जॉइन किया। अपने करियर में उन्होंने डिप्टी कमिश्नर, संयुक्त सचिव, निदेशक, सचिव और अन्य कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।