बीरभूम/कोलकाता: एक दौर था जब शनिवार की सुबह होते ही बीरभूम जिले के इलामबाज़ार (सुखबाज़ार) का शताब्दी पुराना मवेशी हाट (गुरू हाट) गुलजार हो उठता था। दूर-दराज के इलाकों से ट्रकों, वैनों और पैदल चलकर व्यापारी यहां अपने मवेशी लेकर पहुंचते थे। हाट में खरीदार-विक्रेताओं की भीड़, मोल-भाव का शोर और चारों तरफ मवेशियों की आवाजें किसी साप्ताहिक उत्सव जैसी लगती थीं। लेकिन राज्य में हुए राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव के बाद अब यह नजारा पूरी तरह अतीत बन चुका है। नई सरकार की सख्त गाइडलाइंस और प्रतिबंधों के चलते इलामबाज़ार का यह ऐतिहासिक पशु हाट अब पूरी तरह वीरान नजर आ रहा है।
पुलिस प्रशासन की कड़ी चौकसी, वैध कागजात हैं जरूरी
राज्य सरकार के नए दिशा-निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने पशु हाटों पर निगरानी काफी कड़ी कर दी है। बीरभूम जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) सूर्य प्रताप यादव ने स्पष्ट किया, "सरकारी गाइडलाइंस का पालन करते हुए केवल उन्हीं लोगों को व्यापार करने की अनुमति दी जाएगी जिनके पास मवेशी परिवहन और खरीद-बिक्री के वैध कागजात (वैलिड डॉक्यूमेंट्स) होंगे। बिना उचित दस्तावेजों के व्यापार करने की इजाजत किसी को नहीं मिलेगी। जिले के सभी पशु हाटों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।" स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पशु परिवहन, उनका स्वास्थ्य परीक्षण (हेल्थ चेकअप) और जरूरी कागजातों को लेकर बरती जा रही कड़ाई के बाद से ही व्यापारियों ने हाट में आना बंद कर दिया है।
अनुब्रत मंडल मामले से जुड़ा है इतिहास, अब लगा ताला
गौरतलब है कि इलामबाज़ार का यह पशु हाट काफी समय से केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर था। इसी हाट से मुर्शिदाबाद के रास्ते बांग्लादेश में मवेशी तस्करी (काउ स्मगलिंग) के आरोपों की जांच सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) कर रही हैं, जिसके तहत टीएमसी के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार किया गया था। अब राज्य में सत्ता बदलने के बाद दक्षिण बंगाल के इस सबसे बड़े पशु हाट पर प्रशासन ने पूरी तरह शिकंजा कस दिया है। किसी भी तरह की अशांति या अवैध गतिविधि को रोकने के लिए प्रशासन ने फिलहाल शनिवार को लगने वाले इस हाट को अनौपचारिक रूप से बंद रखने का निर्देश दिया है। हालांकि, व्यापारी और प्रशासनिक अधिकारी दोनों मानते हैं कि यह ऐतिहासिक हाट अवैध नहीं है।
कुर्बानी के त्योहार से ठीक पहले व्यापारियों में हाहाकार
हाट के पूरी तरह बंद होने से स्थानीय व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। आगामी दिनों में ईद-उल-अजहा (कुर्बानी) का त्योहार आने वाला है। इस दौरान बाजार में मवेशियों की मांग चरम पर होती है और व्यापार भी काफी ऊंचे दामों पर होता है। हाट के बड़े व्यापारी शेख मतिउर रहमान, शेख हशमत अली और अब्दुल करीम ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "सामने ही कुर्बानी का त्योहार है और इस समय हाट के बंद होने से हमें बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह हाट 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। हमारे परिवारों की रोजी-रोटी इसी से चलती है।"