नई दिल्ली: एक तरफ देश में कानून के शासन और आधुनिक सोच के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ दहेज (यौतुक) जैसी कुप्रथा आज भी देश की बेटियों की जान ले रही है। हाल ही में भोपाल में हुई ट्विशा शर्मा की मौत हो या ग्रेटर नोएडा में दीपिका नागर का मामला, इन घटनाओं ने देश को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन यह समस्या सिर्फ कुछ चुनिंदा घटनाओं तक सीमित नहीं है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़े बताते हैं कि आधुनिक भारत में आज भी दहेज उत्पीड़न और हत्याओं का दायरा कितना भयावह और शर्मनाक रूप ले चुका है।
हर दिन 16 मौतें, देश की राजधानी सबसे आगे
NCRB द्वारा जारी की गई 'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में भारत में दहेज के कारण कुल 5,737 महिलाओं की मौत दर्ज की गई। इसका सीधा और क्रूर मतलब यह है कि आज के दौर में भी देश में हर दिन औसतन 16 महिलाएं दहेज लोभियों की बलि चढ़ रही हैं।
महानगरों (Metropolitan Cities) की बात करें तो देश की राजधानी दिल्ली लगातार पांचवें साल इस सूची में शीर्ष पर बनी हुई है:
- दिल्ली: साल 2024 में दहेज उत्पीड़न के 109 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 111 महिलाओं की मौत हुई। यहाँ प्रति 1 लाख की आबादी पर दहेज मृत्यु दर 1.4 है।
- कानपुर: 54 मामलों के साथ सूची में दूसरे स्थान पर है।
- बेंगलुरु: 25 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है।
इसके विपरीत, दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों जैसे चेन्नई और कोच्चि में साल 2024 में दहेज के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा शून्य (0) रहा।
राज्यों में उत्तर प्रदेश और बिहार शीर्ष पर
देश में दहेज निषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act) साल 1961 में ही लागू हो गया था। पहले आईपीसी (IPC) की धारा 304B के तहत आने वाला यह अपराध, अब नई कानून व्यवस्था 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 80** के रूप में प्रभावी है। इस कानून के तहत शादी के 7 साल के भीतर महिला की असामान्य स्थिति में मौत होने और मौत से ठीक पहले दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने के सबूत मिलने पर इसे सीधे दहेज हत्या माना जाता है।
इसके बावजूद, साल 2023 में ही इस कानून के तहत देश भर में 15,000 से अधिक (15,489) मामले दर्ज किए गए थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 14% ज्यादा थे। राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश 7,151 मामलों के साथ पहले, बिहार 3,665 मामलों के साथ दूसरे और कर्नाटक 2,322 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है।
हालिया घटनाएं जिन्होंने देश की आत्मा को झकझोर दिया
त्विषा शर्मा (33 वर्ष): नोएडा की रहने वाली त्विषा की शादी के महज 5 महीने बाद 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत से पहले अपनी मां को भेजा उनका आखिरी मैसेज— "मेरा बहुत दम घुट रहा है मां"* —सोशल मीडिया पर न्याय की मांग का प्रतीक बन गया है।
दीपिका नागर (24 वर्ष): ग्रेटर नोएडा की रहने वाली दीपिका के परिवार ने शादी में करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसके बावजूद अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने पर उन्हें कथित तौर पर छत से फेंककर मार दिया गया।
महिला स्वात (SWAT) कमांडो: इसी साल जनवरी 2026 में एक महिला स्वात कमांडो की भी उसके पति द्वारा दहेज के लिए हत्या करने का मामला सामने आया। विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना साबित करती है कि देश के उच्च पदों पर बैठी या सुरक्षा बलों में शामिल महिलाएं भी इस सामाजिक बीमारी से सुरक्षित नहीं हैं।
बदलाव की जरूरत: समाजशास्त्रियों का मानना है कि दहेज जैसी गंभीर सामाजिक बुराई को केवल कड़े कानूनों के दम पर खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज को अपनी मानसिकता को बदलना होगा। प्रशासन और आम नागरिकों को महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों के प्रति अधिक संवेदनशील होना पड़ेगा।