नई दिल्ली/कोलकाता: भारतीय राजनीति में हमेशा नए-नए दल और गठबंधन बनते रहे हैं, लेकिन इस बार एक बिल्कुल ही अनोखा और व्यंग्यात्मक (Satirical) राजनीतिक संगठन सामने आया है। इस नए ग्रुप का नाम है 'कॉकरोच जनता पार्टी' (Cockroach Janata Party - CJP)। हालांकि यह कोई आधिकारिक पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक अनोखा विरोध समूह है। लेकिन इसकी गूंज इतनी तेज है कि देश की सत्ताधारी और विपक्षी गलियारों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो हाई-प्रोफाइल सांसद भी इस वर्चुअल पार्टी में शामिल हो चुके हैं।
क्यों हुआ इस 'कॉकरोच पार्टी' का जन्म?
इस अनोखे संगठन की स्थापना सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की एक कथित विवादित टिप्पणी के विरोध में हुई है। पिछले हफ्ते एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की थी कि "बेरोजगार युवा कहीं और सफल न होने पर पत्रकारिता, सामाजिक कार्यकर्ता या कानून जैसे व्यवसायों को अपना लेते हैं।" आरोप लगा कि उन्होंने परोक्ष रूप से बेरोजगारों की तुलना 'कॉकरोच' (आरशोलों) और 'परजीवियों' से की है।
इस बयान पर देश भर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। विपक्ष ने सवाल उठाए कि शीर्ष अदालत के सर्वोच्च पद पर बैठकर ऐसी भाषा कैसे इस्तेमाल की जा सकती है? हालांकि चीफ जस्टिस ने बाद में स्पष्टीकरण दिया कि यह केवल एक मौखिक टिप्पणी थी और इसका गलत अर्थ निकाला गया। लेकिन तब तक विरोध की आग भड़क चुकी थी। लोगों ने शरीर पर कॉकरोच के पोस्टर चिपकाकर विरोध प्रदर्शन किया और इसी बीच रातारात 'कॉकरोच जनता पार्टी' का जन्म हो गया।
संस्थापक कौन हैं और कितनी है ताकत?
CJP के संस्थापक अभिजीत डिमके हैं, जो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र हैं और अतीत में आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम से जुड़े रहे हैं। महज 72 घंटों के भीतर इस वर्चुअल पार्टी के सदस्यों की संख्या 70 हजार पार कर चुकी है।
महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद की एंट्री
महुआ मोइत्रा: कृष्णनगर से टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर इस ग्रुप का सदस्य बनने की इच्छा जताई। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि उन्हें तो पहले से ही 'देशद्रोही पार्टी की सदस्यता' मिली हुई है। इस पर CJP ने उन्हें 'योद्धा' (Warrior) कहकर पार्टी में स्वागत किया।
कीर्ति आजाद: पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने जब इस दल में शामिल होने की योग्यता पूछी, तो CJP ने मजेदार जवाब दिया— "1980 का विश्व कप (1983 वर्ल्ड कप टीम के सदस्य) जीतने की योग्यता ही काफी है।"
CJP का 5 सूत्रीय घोषणापत्र (Manifesto)
खुद को 'धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक और आलसी' बताते हुए CJP ने 5 प्रमुख मांगें रखी हैं:
1. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद राज्यसभा सांसद नहीं बन सकेंगे।
2. संसद में सीटें बढ़ाए बिना महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
3. दलबदल करने वाले विधायकों और सांसदों के चुनाव लड़ने पर कम से कम 20 साल का प्रतिबंध हो।
4. सीबीएसई (CBSE) में कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के नाम पर मनमानी वसूली बंद हो।
5. 'नीट' (NEET) पेपर लीक विवाद में प्रभावित परीक्षार्थियों के साथ मजबूती से खड़ा होना।
सदस्य बनने की शर्तें
पार्टी का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार का बेरोजगार और आलसी होना जरूरी है। साथ ही, सोशल मीडिया पर 24 घंटे एक्टिव रहने और पेशेवरों की तरह गुस्सा जाहिर करने की क्षमता होनी चाहिए। युवाओं और 'जेन-जी' (Gen-Z) पीढ़ी को जोड़ने के लिए यह समूह जल्द ही एक विशेष सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है।
चुनावी आंकड़े: चुनाव आयोग (ECI) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में वर्तमान में 2100 से अधिक राजनीतिक दल हैं। इनमें से 6 राष्ट्रीय और 60 क्षेत्रीय दल हैं। बाकी 2049 दल पंजीकृत हैं लेकिन उन्हें मान्यता नहीं मिली है। अब देखना यह होगा कि CJP केवल एक डिजिटल ट्रेंड बनकर रह जाती है या भविष्य में चुनाव आयोग में खुद को पंजीकृत कराएगी।