कोलकाता:पश्चिम बंगाल में जल प्रबंधन, सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बड़े कदम उठाने जा रही हैं। सोमवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की पहल पर एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हिस्सा लिया। इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, केंद्रीय राज्य मंत्री वी. सोमान्न और केंद्र व राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य जल जीवन मिशन (JJM) के तहत चल रही योजनाओं की समीक्षा करना और गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना था।
MoU और काम की प्रगति पर मिलेंगे ₹2,775 करोड़
बैठक के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पश्चिम बंगाल को संभावित रूप से ₹2,775 करोड़ आवंटित करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फंड पूरी तरह से समझौता ज्ञापन (MoU) की शर्तों को पूरा करने और जमीन पर परियोजनाओं के क्रियान्वयन (इम्प्लीमेंटेशन) की प्रगति पर निर्भर करेगा।
दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और पुरुलिया पर विशेष जोर
इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के पहाड़ी और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की समस्या को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया गया। केंद्र सरकार ने दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और पुरुलिया जिलों में पेयजल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया। इसके साथ ही, केंद्र की ओर से राज्य प्रशासन को डीपीआर (DPR) से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने, रद्द या डुप्लिकेट परियोजनाओं की लागत और अपैक्स कमेटी (Apex Committee) की रिपोर्ट का जल्द से जल्द निपटारा करने को कहा गया है।
जमीन की कमी से रुकी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजनाओं को मिलेगी गति
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा प्रदूषण को रोकने के लिए बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पर भी विस्तृत चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जमीन की कमी (Land Acquisition) के कारण बंगाल में कई महत्वपूर्ण एसटीपी परियोजनाएं लंबे समय से अधर में लटकी हुई हैं। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को जमीन संबंधी दिक्कतों को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए और आश्वासन दिया कि गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
'जल संचय जन भागीदारी' को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
बैठक में आगामी मानसून से पहले बारिश के पानी के संरक्षण (Rainwater Harvesting) और 'जल संचय जन भागीदारी' कार्यक्रम को एक व्यापक जन आंदोलन में बदलने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासनों को सक्रिय भूमिका निभाने और मानसून से पहले जल संरक्षण से जुड़े सभी कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "हमारी सरकार जनहित में पेयजल, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ (सस्टेनेबल) जल प्रबंधन के क्षेत्र में केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय बनाकर काम करेगी। बंगाल के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। हमारा संकल्प है कि जल जीवन मिशन का काम तेजी से पूरा कर राज्य के हर परिवार तक सुरक्षित और शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाए।" बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने राज्य को हर संभव मदद का भरोसा दिया।