नई दिल्ली. जापान समंदर में चीन को घेरने की रणनीति के तहत भारत में सैन्य अभ्यास की संभावनाएं तलाश रहा है। जापान की थल आत्मरक्षा बल यानी जीएसडीएफ ने अपने अधिकारियों को भारत भेजा था। जीएसडीएफ प्रमुख जनरल अराई मसायोशी ने 27 अक्टूबर को संवाददाता सम्मेलन में इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ विभिन्न मुद्दों पर समन्वय स्थापित करने के लिए अधिकारियों को भेजा गया था। जापानी अधिकारियों ने अक्टूबर के मध्य में भारत आकर करीब एक सप्ताह तक परीक्षण सुविधाओं और फायरिंग रेंज का निरीक्षण किया।
अभ्यास अभी अंतिम रूप से तय नहीं
अभी यह तय नहीं हुआ है कि अभ्यास में किस मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल होगा। सैन्य अभ्यास आयोजित करने पर भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। जापान की इस पहल के पीछे लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों का प्रभावी प्रशिक्षण एक बड़ी चुनौती है। जनरल अराई ने कहा कि सतह से समुद्र पर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों के मामले में उनकी पूरी मारक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए प्रशिक्षण आयोजित करना मुश्किल है। जापान अपने देश में उपयुक्त प्रशिक्षण स्थल उपलब्ध कराने के साथ विदेशों में मौजूद सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
नई टाइप-25 मिसाइल की क्षमता
जापान की नई टाइप-25 सतह से समुद्र पर मार करने वाली निर्देशित मिसाइल इसकी बदलती सैन्य क्षमता का उदाहरण है। इसे मार्च 2026 में जापान के कुमामोतो प्रांत स्थित केंगुन सैन्य शिविर में तैनात किया गया था। इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर मानी जाती है। इससे पहले इस्तेमाल की जाने वाली टाइप-12 मिसाइल की मारक क्षमता करीब 200 किलोमीटर थी। लंबी दूरी के हथियार हासिल करने के साथ सैनिकों को उन्हें प्रभावी ढंग से तैनात करने और संचालित करने का प्रशिक्षण देना भी जरूरी है। जापान इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी
भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार हैं। दोनों देश पहले से द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास करते हैं और अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड में भी सहयोग करते हैं। क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों और जटिल होते सुरक्षा वातावरण के बीच भारत-जापान रक्षा संबंधों का महत्व बढ़ा है। जनरल अराई ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार है। तेजी से जटिल होते सुरक्षा वातावरण में विभिन्न प्रकार के रक्षा सहयोग तथा आदान-प्रदान को बढ़ावा देना जरूरी है।
चीन की समुद्री चुनौती और जवाब
जापान की इस पहल का मुख्य उद्देश्य समुद्र में चीन की बढ़ती सक्रियता का मुकाबला करना है। लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों का प्रशिक्षण जापान की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा। भारत की फायरिंग रेंज और सुविधाएं इस प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त मानी जा रही हैं। दोनों देश क्वाड के माध्यम से भी क्षेत्रीय सुरक्षा पर सहयोग बढ़ा रहे हैं। जापान विदेशों में प्रशिक्षण स्थलों की तलाश कर अपनी सैन्य तैयारियों को बेहतर बनाना चाहता है। भारत के साथ सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
आगे की संभावनाएं और सहयोग
यदि अभ्यास को अंतिम रूप दिया जाता है तो यह भारत-जापान रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देगा। एंटी-शिप मिसाइल और ड्रोन के संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों देशों की सैन्य क्षमताएं मजबूत होंगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साझा हित दोनों देशों को करीब ला रहे हैं। जापान की टीम के निरीक्षण के बाद आगे की बातचीत और समन्वय बढ़ने की उम्मीद है। रक्षा सहयोग के नए आयाम खुलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।