केदारनाथ. उत्तराखंड के केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच स्थित मुनकटिया क्षेत्र में अचानक भारी भूस्खलन होने से अफरा-तफरी मच गई। पहाड़ी से लगातार गिरते पत्थरों और मलबे ने मुख्य मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे हजारों श्रद्धालु बीच रास्ते में ही फंस गए। घटना के समय क्षेत्र में अंधेरा और खराब मौसम होने के कारण हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गए। तीर्थयात्रियों के बीच भय और बेचैनी का माहौल बन गया, क्योंकि मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए थे।
रात 9 बजे के बाद शुरू हुआ आपातकालीन अभियान
जानकारी के अनुसार 19 मई 2026 की रात लगभग 9 बजकर 16 मिनट पर रुद्रप्रयाग आपदा नियंत्रण कक्ष को भूस्खलन की सूचना मिली। हालात की गंभीरता को देखते हुए तुरंत SDRF और NDRF की टीमों को सक्रिय किया गया। बचाव दल आवश्यक उपकरणों और सुरक्षा संसाधनों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पहाड़ी क्षेत्र की संकरी पगडंडियां, लगातार गिरते पत्थर और घना अंधेरा रेस्क्यू टीमों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे, लेकिन इसके बावजूद राहत अभियान बिना देरी शुरू कर दिया गया।
खराब मौसम और अंधेरे के बीच दिखाया साहस
बचाव अभियान के दौरान मौसम लगातार खराब बना रहा और ऊपर से मलबा गिरने का खतरा भी बना हुआ था। इसके बावजूद SDRF और NDRF के जवानों ने साहस, धैर्य और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक-एक श्रद्धालु को सुरक्षित निकालने का कार्य जारी रखा। कई स्थानों पर यात्रियों को बेहद सावधानी के साथ पैदल मार्ग पार कराया गया। अधिकारियों के अनुसार अभियान पूरी रात चलता रहा और राहत टीमों ने समन्वय के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में काम किया।
10,450 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने में मिली सफलता
संयुक्त रेस्क्यू अभियान के तहत कुल 10,450 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत एजेंसियों के अनुसार किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है, जिसे इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। बचाए गए यात्रियों में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल थे। कई श्रद्धालुओं ने राहतकर्मियों की बहादुरी और तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु
केदारनाथ धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस यात्रा सीजन में अब तक साढ़े छह लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। लगातार बढ़ती संख्या के कारण यात्रा मार्गों पर दबाव भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और भूस्खलन जैसी घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाए जाने की जरूरत है।
प्रशासन ने यात्रियों से की सतर्क रहने की अपील
घटना के बाद प्रशासन ने यात्रियों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और प्रशासनिक निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। ऐसे में यात्रा के दौरान सतर्कता और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद आवश्यक है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और मार्ग को पूरी तरह बहाल करने का कार्य जारी है।