कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और दमघोंटू उमस ने न केवल इंसानों का जीना मुहाल कर रखा है, बल्कि चिड़ियाघर के बेजुबान जानवर भी इससे बुरी तरह तड़प रहे हैं। इंसानों के पास तो गर्मी से बचने के लिए ठंडे पेय पदार्थ या आइसक्रीम का विकल्प है, लेकिन पिंजरों में बंद इन वन्यजीवों के लिए विशेष देखभाल की जरूरत है। इसी स्थिति को देखते हुए कोलकाता के ऐतिहासिक अलीपुर चिड़ियाघर (Alipore Zoo) प्रशासन ने पशु-पक्षियों को लू और हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए कई बड़े और अनोखे इंतजाम किए हैं।
स्प्रिंकलर और विशेष छांव की व्यवस्था
अलीपुर चिड़ियाघर की डायरेक्टर तृप्ति शाह ने बताया कि इस जानलेवा गर्मी में जानवरों के लिए पानी की किल्लत और डिहाइड्रेशन सबसे बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए प्रशासन निम्नलिखित कदम उठा रहा है:
वॉटर स्प्रिंकलर: जानवरों के बाड़ों (Enclosures) में पानी की बौछार करने वाले स्प्रिंकलर लगाए जा रहे हैं, ताकि वहां का तापमान कम रह सके और जानवरों को ठंडक मिले।
पर्याप्त पेयजल: चौबीसों घंटे पिंजरों में साफ और पर्याप्त ठंडे पानी की व्यवस्था की जा रही है।
दरमा की विशेष छांव: तेज धूप सीधे जानवरों पर न पड़े, इसके लिए बांस और कूस (दरमा) से बने विशेष शेड (छौनी) तैयार किए जा रहे हैं।
खान-पान में बड़ा बदलाव: तरबूज और फलों की बहार
गर्मी के मौसम में जानवरों के शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए उनके खान-पान (डाइट चार्ट) में बदलाव किया गया है। शाकाहारी जीवों और भालू, बंदर जैसे जानवरों की थाली में पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा और अन्य मौसमी फल** बड़ी मात्रा में शामिल किए जा रहे हैं।
मांसाहारी जीवों के मेन्यू से हट सकता है बीफ, चिकन-पॉर्क पर विचार
सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील बदलाव मांसाहारी तथा 'बिग कैट' प्रजाति के जीवों (जैसे शेर, बाघ, तेंदुए और लकड़बग्घे) के भोजन में करने की तैयारी चल रही है। आमतौर पर उच्च वसा (हाई फैट) और प्रोटीन की जरूरत को पूरा करने के लिए इनके दैनिक आहार में 'बीफ' (गोमांस) दिया जाता है। लेकिन अत्यधिक गर्मी में भारी मांस पचाना जानवरों के लिवर और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
इसलिए, चिड़ियाघर प्रशासन भविष्य में इनके मेन्यू से बीफ को हटाकर उसकी जगह हल्का और सुपाच्य चिकन (मुर्गे का मांस) और पॉर्क (सूअर का मांस) शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
पशु चिकित्सकों से होगी चर्चा: इस संबंध में चिड़ियाघर की डायरेक्टर तृप्ति शाह ने स्पष्ट किया, "गर्मियों में मांसाहारी वन्यजीवों के पाचन को ठीक रखने के लिए डाइट बदलने पर विचार चल रहा है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला चिड़ियाघर के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) के साथ विस्तृत चर्चा और उनकी मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।"चिड़ियाघर प्रशासन की इन अग्रिम तैयारियों से उम्मीद जताई जा रही है कि पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले इन बेजुबानों को इस साल बंगाल की भीषण गर्मी से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।