कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद नई सरकार का एक्शन मोड लगातार जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को शुभेंदु अधिकारी सरकार ने एक और बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर डॉक्टर नेता निर्मल माजी को वेस्ट बंगाल मेडिकल काउंसिल (WBMC) से बर्खास्त कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से बाकायदा अधिसूचना (Notification) जारी कर इस फैसले की जानकारी दी गई है। निर्मल माजी को मेडिकल काउंसिल में राज्य सरकार के मनोनीत प्रतिनिधि के तौर पर शामिल किया गया था, लेकिन सरकार बदलते ही उन्हें इस महत्वपूर्ण पद से हटा दिया गया है।
हालिया विधानसभा चुनाव में मिली थी करारी हार
गौरतलब है कि पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार में मंत्री रह चुके निर्मल माजी ने साल 2026 के विधानसभा चुनाव में हुगली जिले की गोघाट सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें बीजेपी उम्मीदवार के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। चुनाव में हार के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी उनके खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई की गई है।
'ममता ही मां शारदा हैं' बयान पर मचा था भारी बवाल
निर्मल माजी का करियर विवादों से पुराना नाता रहा है। करीब चार साल पहले उनका एक बयान पूरे देश में सुर्खियों में आया था, जिसमें उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की तुलना मां शारदा से कर दी थी। उन्होंने दावा किया था, "सांख्यिकी और गणितीय हिसाब से देखा जाए तो मां शारदा के देहांत और ममता बनर्जी के जन्म का समयकाल पूरी तरह मेल खाता है। ममता बनर्जी ही वास्तव में मां शारदा का अवतार हैं, वही फ्लोरेंस नाइटिंगेल, सिस्टर निवेदिता और मां दुर्गा हैं। जिनका जन्म अष्टमी और नवमी के संधि काल में होता है, वे ही युगों-युगों में नए रूप में देश और काल के अनुसार अवतरित होते हैं।" उनके इस बयान की हिंदू संगठनों और रामकृष्ण मिशन के अनुयायियों ने कड़ी निंदा की थी।
एसएसकेएम अस्पताल में 'कुत्ते के डायलिसिस' का अनोखा विवाद
इससे पहले साल 2015 में निर्मल माजी का नाम कोलकाता के प्रसिद्ध एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में एक अनोखे विवाद से जुड़ा था। आरोप था कि तत्कालीन रसूखदार मंत्री निर्मल माजी के प्रभाव में आकर राज्य मेडिकल काउंसिल के एक पूर्व अध्यक्ष के पालतू कुत्ते का डायलिसिस इंसानों के वार्ड में कराने की पूरी तैयारी कर ली गई थी।
अस्पताल के तत्कालीन निदेशक डॉ. प्रदीप मित्र ने इसके लिए मौखिक अनुमति भी दे दी थी और विभागाध्यक्ष राजेंद्र पांडे ने डॉक्टरों को निर्देश भी जारी कर दिए थे। हालांकि, आखिरी समय पर डायलिसिस वार्ड के एक विजिटिंग डॉक्टर के कड़े विरोध और लिखित नोट के बाद कुत्ते का डायलिसिस रोका जा सका था, जिसने काफी तूल पकड़ा था।
मेडिकल कॉलेज में छात्रों ने लगाए थे 'चोर-चोर' के नारे
विवादों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। इसी साल जनवरी में कोलकाता मेडिकल कॉलेज के स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे निर्मल माजी को छात्रों के जबरदस्त आक्रोश का सामना करना पड़ा था। जैसे ही वे कॉलेज परिसर में दाखिल हुए, छात्रों के एक गुट ने उन्हें घेर लिया और 'चोर-चोर' तथा 'गो बैक' के नारे लगाने शुरू कर दिए। छात्रों के भारी विरोध और हंगामे के कारण पूर्व मंत्री को अपना भाषण अधूरा छोड़कर ही कार्यक्रम से उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा था।