नई दिल्ली. श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के 100वें स्थापना दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण पारंपरिक राजनीतिक संबोधन से कुछ अलग नजर आया। युवाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए उन्होंने उनकी रोजमर्रा की बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का सहारा लिया। ‘ओजी’ और ‘फ्लेक्स’ जैसे शब्दों के साथ उन्होंने कॉलेज से जुड़े स्थानीय संदर्भों और युवाओं के बीच लोकप्रिय चीजों का भी उल्लेख किया। ‘क्वाप की चाय’ और ‘कोल्ड कॉफी’ जैसे संदर्भों ने भाषण को छात्रों के लिए और अधिक सहज बना दिया। प्रधानमंत्री की इस शैली ने समारोह में मौजूद विद्यार्थियों का ध्यान खींचा और भाषण के बाद भी परिसर में इसकी चर्चा होती रही।
सामने से प्रधानमंत्री को देखने का अनुभव छात्रों के लिए खास
प्रधानमंत्री को पहली बार इतने करीब से देखने का अनुभव कई विद्यार्थियों के लिए विशेष उत्साह का विषय रहा। कॉलेज की छात्राओं दिशा और प्रनिका ने कहा कि स्क्रीन पर प्रधानमंत्री को देखने और सामने बैठकर उनका संबोधन सुनने में काफी अंतर महसूस हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री के बोलने के अंदाज और भाषण की प्रभावशीलता की सराहना की। छात्रों के मुताबिक, भाषण में औपचारिक राजनीतिक भाषा के साथ युवाओं की परिचित शब्दावली का मेल उन्हें स्वाभाविक लगा। इससे प्रधानमंत्री और विद्यार्थियों के बीच संवाद का भाव मजबूत हुआ और समारोह केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। कॉलेज के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री की मौजूदगी को विद्यार्थियों ने अपने संस्थान के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर माना।
2014 से अब तक के बदलावों का भी मिला संदर्भ
कॉलेज की प्रथम वर्ष की छात्रा भान्वी ने प्रधानमंत्री के भाषण में देश में 2014 से अब तक हुए बदलावों और भविष्य की योजनाओं का उल्लेख महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने नेतृत्व क्षमता और विकास के अलग-अलग पहलुओं को युवाओं के सामने रखा। भाषण के दौरान जनधन योजना और UPI जैसी पहलों का उदाहरण देते हुए यह बताया गया कि शुरुआती दौर में सामने आई आशंकाओं और विरोध के बावजूद डिजिटल लेनदेन ने आम लोगों के जीवन में किस तरह बदलाव किया। विद्यार्थियों के लिए यह हिस्सा इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इसमें नीतिगत फैसलों को उनके प्रत्यक्ष सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से जोड़कर समझाने का प्रयास किया गया। इससे भाषण में केवल प्रेरक संदेश ही नहीं, बल्कि पिछले वर्षों में हुए बदलावों का संदर्भ भी शामिल रहा।
बोलचाल की भाषा से युवाओं से जुड़ने की कोशिश
सर्वेश्वर नाम के छात्र ने कहा कि प्रधानमंत्री ने युवाओं से जुड़ने के लिए उनकी बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक, भाषण का मूल संदेश यह था कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है और आने वाले समय में उन्हें अपनी क्षमता के अनुरूप बड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। युवाओं की भाषा और उनके बीच प्रचलित शब्दों का इस्तेमाल करने से भाषण अधिक सहज और सीधे संवाद जैसा महसूस हुआ। विद्यार्थियों ने इसे नई पीढ़ी के साथ राजनीतिक नेतृत्व के संवाद को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा। समारोह में मौजूद छात्रों के लिए यह शैली इसलिए भी उल्लेखनीय रही, क्योंकि इसमें कॉलेज की अपनी संस्कृति और युवा जीवन से जुड़े संदर्भों को राष्ट्रीय विकास के व्यापक विमर्श से जोड़ा गया।
2047 के विकसित भारत से युवाओं को जोड़ने का संदेश
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के 2002 बैच के पूर्व छात्र अमित चुग ने प्रधानमंत्री के संबोधन की सराहना करते हुए इसे कॉलेज की 100 वर्ष की यात्रा के अनुरूप बताया। उन्होंने माना कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी और उनसे सीधे जुड़ने का प्रयास महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने भी अपने संबोधन में युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और महत्वाकांक्षाओं को देश की दीर्घकालिक प्रगति से जोड़ने पर जोर दिया। ऐसे में कॉलेज के शताब्दी समारोह का मंच केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के सामने भविष्य की जिम्मेदारियों और संभावनाओं का खाका रखने का माध्यम भी बना।
छात्रों ने विकास और नेतृत्व के संदेश को सराहा
प्रथम वर्ष के छात्र किसलय त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री के भाषण को देश की प्रगति में युवाओं की जिम्मेदारी से जोड़ते हुए इसे स्पष्ट संदेश वाला संबोधन बताया। उनके अनुसार, युवाओं को केवल अवसरों की तलाश करने के बजाय स्वयं को उन अवसरों के योग्य बनाने की दिशा में भी काम करना चाहिए। भाषण में 2013 और 2026 के बीच देश में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए विकास की गति और उसके प्रभावों को सामने रखने का प्रयास किया गया। छात्रों ने सरकार की विभिन्न पहलों और उनके परिणामों की भी सराहना की। किसलय ने सच और झूठ के संदर्भ में प्रधानमंत्री के संदेश को रेखांकित करते हुए कहा कि अंततः वास्तविकता और उपलब्धियां ही किसी दावे की कसौटी बनती हैं।
कॉलेज की शताब्दी और नई पीढ़ी की बड़ी जिम्मेदारी
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की 100 वर्ष की यात्रा ऐसे समय में सामने आई है, जब देश की युवा आबादी को आर्थिक विकास, तकनीकी बदलाव और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नए दौर के साथ आगे बढ़ना है। प्रधानमंत्री के भाषण में कॉलेज की ऐतिहासिक विरासत को युवाओं की भविष्य की भूमिका के साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई दी। विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाओं से भी स्पष्ट हुआ कि उन्हें भाषण में केवल राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि शिक्षा, नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अवसरों की चर्चा महत्वपूर्ण लगी। युवाओं की भाषा में संवाद करने की कोशिश ने इस संदेश को विद्यार्थियों के बीच अधिक सहज बनाया। शताब्दी समारोह से निकला व्यापक संदेश यही रहा कि आने वाले भारत की दिशा तय करने में आज के विद्यार्थियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।