कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'दिलीप घोष' (Dilip Ghosh) एक ऐसा नाम है, जिसके साथ विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है। विपक्ष के खिलाफ उनके 'दबंग' डायलॉग हों या गायों को लेकर दिए गए उनके पुराने बयान, वे जब भी मुंह खोलते हैं, एक नया सियासी बवंडर खड़ा हो जाता है। कभी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे और अब मौजूदा सरकार में पंचायत, पशु संसाधन और कृषि विपणन मामलों के कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष एक बार फिर अपने ताजा बयान को लेकर चर्चा के केंद्र बिंदु में आ गए हैं। इस बार उन्होंने दावा किया है कि गाय को दुलारने और उसकी पीठ पर हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर कम हो जाता है।
चाय-चर्चा में बोले मंत्री– "कूबड़ पर हाथ फेरने से गिरता है बीपी"
मंगलवार को कोलकाता के कांकुड़गाछी इलाके में आयोजित एक 'चाय-पे-चर्चा' (चाय-चक्र) कार्यक्रम में मंत्री दिलीप घोष शामिल हुए थे। वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने गोमाता की उपयोगिता और फायदों पर बात की। दिलीप घोष ने कहा:
"अगर आप गाय को प्यार करते हैं, उसे दुलारते हैं, तो आपका ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) कम हो सकता है। गाय के गलकंबल (गले के नीचे की लटकती त्वचा) या उसकी पीठ के कूबड़ पर नियमित रूप से हाथ फेरने से बढ़ा हुआ रक्तचाप बहुत तेजी से नीचे आ जाता है।"
उत्तर प्रदेश के मंत्री भी कर चुके हैं ऐसा ही दावा
दिलचस्प बात यह है कि ऐसा दावा करने वाले दिलीप घोष अकेले नेता नहीं हैं। करीब दो साल पहले उत्तर प्रदेश के एक मंत्री संजय सिंह गंगवार ने भी 'कान्हा गौशाला' के उद्घाटन के दौरान बिल्कुल ऐसा ही दावा किया था। यूपी के मंत्री ने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति दिन में दो बार नियमित रूप से गाय की पीठ पर हाथ फेरता है, तो उसका ब्लड प्रेशर कम हो जाएगा। उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि गाय की सेवा करने से महज 10 दिनों के भीतर बीपी की दवा का पावर 20 मिलीग्राम से घटकर 10 मिलीग्राम पर आ जाएगा। मंगलवार को बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने भी इसी तर्ज पर अपनी बात रखी।
विवादों से पुराना नाता: 'दूध में सोना और गोमूत्र' पर भी अड़े रहे
यह पहली बार नहीं है जब दिलीप घोष ने गायों को लेकर ऐसा 'वैज्ञानिक' या 'विशेषज्ञ' जैसा दावा किया हो। इससे पहले साल 2019 में जब वे बीजेपी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष थे, तब उन्होंने एक जनसभा में दावा किया था कि "भारतीय गायों के दूध में सोना (Gold) पाया जाता है, जिसके कारण उसका रंग हल्का पीला होता है।"
इसके बाद, कोरोना महामारी (Covid-19) के दौर में उन्होंने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने के लिए गोमूत्र को अनिवार्य और बेहद असरदार बताया था। उस समय उनके इन बयानों को लेकर पूरे देश की राजनीति और चिकित्सा जगत में काफी थू-थू हुई थी और लंबा विवाद चला था। अब सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के बाद भी दिलीप घोष गोमाता के चमत्कारों को लेकर अपने पुराने स्टैंड पर पूरी तरह अड़े हुए नजर आ रहे हैं। इस ताजा बयान के बाद विपक्ष को एक बार फिर उन पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।