पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद से ही केंद्र-राज्य संबंधों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। पिछले एक दशक से ममता बनर्जी सरकार के दौर में जिन केंद्रीय योजनाओं को बंगाल में लागू नहीं होने दिया गया था, उन्हें अब हरी झंडी मिल रही है। आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन के बाद अब पश्चिम बंगाल आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी **'स्वच्छ भारत मिशन' (Swachh Bharat Mission)** में शामिल हो गया है।
दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद राज्य की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने घोषणा की है कि बंगाल के चार प्रमुख शहरों में इस मिशन के तहत पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहे हैं।
10 साल बाद बैठक में शामिल हुआ बंगाल
मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 'स्वच्छ भारत मिशन' को लेकर सभी राज्यों की एक समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल शामिल हुईं। पिछले 10 वर्षों में यह पहला मौका था जब बंगाल का कोई मंत्री स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी किसी केंद्रीय बैठक में हिस्सा लेने पहुंचा।
बैठक के बाद अग्निमित्रा पॉल ने पिछली टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:
"पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हम स्वच्छ भारत परियोजना के तहत राज्य में कोई ठोस काम नहीं कर पाए। जबकि देश के अन्य राज्य इस मिशन में बहुत बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं, बंगाल में इस योजना का मात्र 16 प्रतिशत पैसा ही खर्च किया जा सका था।"
बंगाल को मिलेंगे 200 करोड़, इन 4 शहरों से होगी शुरुआत
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ हुई बैठक के नतीजों की जानकारी देते हुए अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि केंद्र सरकार ने बंगाल के लिए बजट की कोई कमी न होने का आश्वासन दिया है।
पायलट प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:
फंडिंग: बंगाल को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुरुआती तौर पर 200 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मिल रहा है।
चयनित शहर: प्राथमिक चरण में राज्य के चार शहरों को इस पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया गया है:
1. दुर्गापुर
2. आसनसोल
3. कालिम्पोंग
4. दार्जिलिंग
लक्ष्य: इन चारों शहरों को पूरी तरह से **'प्लास्टिक मुक्त' (Plastic-Free) बनाया जाएगा।
सिर्फ मुख्य सड़कें नहीं, अलिगलियों की भी होगी सफाई
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने साफ किया कि इस बार स्वच्छता अभियान सिर्फ दिखावे के लिए या मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा। शहरों के अंदरूनी हिस्सों, रिहायशी इलाकों और संकरी अलिगलियों की सफाई पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, वेस्ट मैनेजमेंट (कूड़ा-कचरा प्रबंधन) की आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि कचरे को दोबारा इस्तेमाल (Recycle) के योग्य बनाकर राजस्व और ऊर्जा पैदा की जा सके।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में बच्चों में स्वच्छता की आदत डालने के लिए स्कूली स्तर पर 'स्वच्छ भारत' को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।
महीने के अंत में बंगाल आएंगे केंद्रीय मंत्री
राज्य में स्वच्छता को लेकर चल रही इस तैयारी के बीच अग्निमित्रा पॉल ने जानकारी दी कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर इसी महीने (मई) के अंत में पश्चिम बंगाल के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वह राज्य में केंद्रीय योजनाओं की प्रगति और स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे।
गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनने के बाद से ही राज्य में स्वच्छता और बुनियादी ढांचे में सुधार को लेकर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में सियालदह और हावड़ा जैसे बड़े स्टेशनों के आसपास से अतिक्रमण और अवैध हॉकरों को हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई भी की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य इन व्यस्त इलाकों को स्वच्छ और सुंदर बनाना था।