नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। खड़गे ने शनिवार को चीनी की कीमतों और उपलब्ध स्टॉक को लेकर सरकार से तीन सवाल किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ विदेश से चीनी आयात करनी पड़ रही है और दूसरी ओर गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में किया जा रहा है, तो फिर इसे आत्मनिर्भर भारत कैसे कहा जा सकता है।
देश के कई शहरों में चीनी की खुदरा कीमत ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गई है। पिछले तीन महीनों में चीनी के दाम करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग ₹19 प्रति किलो तक बढ़ने की बात सामने आई है।
खड़गे ने सरकार से पूछे 3 सवाल
मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की कीमतों और स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि जब देश में चीनी का उत्पादन होता है, तो फिर विदेश से इसका आयात क्यों करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ घरेलू बाजार में चीनी महंगी हो रही है। खड़गे ने सरकार से चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
3 महीने में ₹19 तक महंगी हुई चीनी
देश के कई शहरों में चीनी की कीमत ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि पिछले तीन महीनों में इसके दाम करीब 40 प्रतिशत बढ़े हैं।यानी इस अवधि में चीनी की कीमत में करीब ₹19 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। कीमतों में तेजी से आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर भी असर पड़ रहा है।
सरकार ने एथेनॉल को जिम्मेदार मानने से किया इनकार
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए एथेनॉल उत्पादन को इसका कारण मानने से इनकार किया था।सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
कीमत कम करने के लिए 10 लाख टन रॉ शुगर आयात
घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर (कच्ची चीनी) के शुल्क मुक्त आयात को मंजूरी दी है।सरकार की कोशिश है कि आयात के जरिए घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाई जाए और कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।
एथेनॉल और चीनी को लेकर बढ़ी सियासी बहस
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस का आरोप है कि गन्ने के इस्तेमाल की प्राथमिकता को लेकर सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए।वहीं केंद्र सरकार एथेनॉल उत्पादन को चीनी की मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी का कारण मानने से इनकार कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में चीनी की कीमत और एथेनॉल नीति दोनों राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।