संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को नया समर्थन मिला है। हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन किया। यह समर्थन पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट के दौरान सामने आया। विदेश मंत्री एस जयशंकर के संबोधन के बीच यूरोपीय देशों का यह रुख भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग को मजबूती प्रदान करता है। वैश्विक व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जयशंकर का बहुपक्षवाद पर जोर
विदेश मंत्री एस जयशंकर और यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट को संबोधित किया। दोनों ने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना कोई भी देश अकेले नहीं कर सकता। इसके लिए देशों के बीच सहयोग, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जरूरी है। जयशंकर ने कहा कि जब नई क्षमताएं और चिंताएं सामने आती हैं तो नए फ्रेमवर्क और सुरक्षा उपायों की जरूरत महसूस होती है। जियो-पॉलिटिकल प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ बहुपक्षवाद में बदलाव की मांग और प्रासंगिक हो गई है।
4F संकट और सामूहिक समाधान की जरूरत
जयशंकर ने 4F यानी फ्यूल, फूड, फर्टिलाइजर और फाइनेंस के संकट का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में चल रहे संघर्षों के बीच शांति के प्रयासों के साथ-साथ इन विशिष्ट पहलुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। अगर आयोजन की थीम पर ध्यान दें तो तमाम ज्वलंत वैश्विक समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयासों और नई पहलों के मेल से हासिल किया जा सकता है। फ्रांस और इक्वाडोर के विदेश मंत्रियों से मुलाकात के बाद उन्होंने इन मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
भारत का प्रस्तावित रोडमैप
जयशंकर ने कहा कि सामूहिक प्रयासों, नई शुरुआत और थोड़े से बदलाव के साथ हर संकट का समाधान निकाला जा सकता है। वैश्विक सहयोग का असर केवल कूटनीतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं है। शांति और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय, उभरती तकनीक, विकास के लिए वित्त, आतंकवाद से मुकाबला, मजबूत सप्लाई चेन, आपदा प्रबंधन और महामारी से निपटने की तैयारी जैसे मुद्दों पर देशों की सामूहिक कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, नियम और मानदंडों के ईमानदारी से पालन पर जोर दिया।
यूरोपीय नेताओं के साथ मिलकर बदलाव का आह्वान
यूरोपीय यूनियन के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, भारत और केन्या के साथ मिलकर इस पहल की पहली बैठक की सह-मेजबानी महत्वपूर्ण है। दुनिया एक अहम मोड़ पर खड़ी है जहां टकराव बढ़ा है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आर्थिक असुरक्षा जैसी चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं। इस बार की थीम विश्वास बहाली और बदलाव का प्रबंधन है ताकि संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था सभी के लिए काम करे।