कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी विधायकों के कमरों को लेकर चल रही खींचतान के बीच स्पीकर रथींद्र बोस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी दल के विधायकों को सम्मान और गरिमा के साथ कमरे आवंटित किए जाएंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हें किसी तरह की बुनियादी असुविधा का सामना न करना पड़े।
विपक्षी विधायकों को सम्मानजनक व्यवस्था देने का आश्वासन
मंगलवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान स्पीकर रथींद्र बोस ने कहा कि विपक्षी विधायकों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ कमरे तैयार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अतीत में भाजपा विधायकों को विपक्ष में रहते हुए कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन मौजूदा विपक्ष के साथ वैसा व्यवहार नहीं होगा। स्पीकर ने कहा, "जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उनके विधायकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था। मैं नहीं चाहता कि वर्तमान विपक्ष को ऐसी किसी दिक्कत से गुजरना पड़े। उन्हें सम्मान के साथ उचित व्यवस्था दी जाएगी।”
कमरों को लेकर जटिलता खत्म करने की कोशिश
विधानसभा में विपक्षी दल के कमरों को लेकर हाल के दिनों में विवाद और असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इस पर स्पीकर ने कहा कि विपक्षी नेताओं का राजनीतिक अनुभव काफी लंबा है और उनकी गरिमा बनाए रखना विधानसभा की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कमरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
नौशाद सिद्दीकी को अलग कमरा मिलेगा?
भांगड़ से आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी को विधानसभा में अलग कमरा दिए जाने को लेकर भी चर्चा तेज है। इस मुद्दे पर स्पीकर रथींद्र बोस ने कहा कि यदि नौशाद सिद्दीकी अलग कमरे के लिए औपचारिक आवेदन करते हैं, तो उस पर विचार किया जाएगा।
18 जून से शुरू होगा बजट सत्र
पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र आगामी 18 जून से शुरू होने जा रहा है। स्पीकर ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करना है और इसके लिए सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
क्या इस बार विधानसभा सत्र होगा लाइव?
आगामी बजट सत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। स्पीकर ने संकेत दिया है कि विधानसभा की कार्यवाही के लाइव टेलीकास्ट को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। अगर यह योजना लागू होती है, तो आम लोग सीधे देख सकेंगे कि उनके चुने हुए जनप्रतिनिधि सदन में किस तरह काम कर रहे हैं। यह कदम विधानसभा की कार्यवाही में पारदर्शिता बढ़ाने और जनता को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सीधे जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है।